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Ancient India, economy of Harappan civilization प्राचीन भारत , हड़प्पा सभ्यता की अर्थव्‍यवस्‍था

                                                   कृषी एवं पशुपालन  1. यहाँ के लोग गेहुँ एवं जौ की वृहत पैमाने पर कृषि करते थे। कुछ अन्य फसलें जो इस समय उगाई  जाती थी, वे है – दालें, अनाज, कपास, खजूर, मटर, तरबूज एवं सरसों। 2. चावल की खेती के स्पष्ट साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए है। केवल रंगपुर एवं लोथल से चावल के कुछ दाने प्राप्त  हुए हैं, परन्तु संभवत: वह बाद की अवधि के हैं। 3. हडप्पा के लोग अधिकतर किसान थे, अत: यह कहा जा सकता है कि हडप्पा सभ्यता एक कृषि  वाणिज्यिक सभ्यता थी। 4. कालीबंगा एवं बनवाली से हल एवं कुदाल के साक्ष्य प्राप्त हुए है। 5. हडप्पा सभ्यता के लोग भेड, बकरी, भैंस एवं सुवर पालते थे। वे बाघ, ऊँट, हाथी, कछुआ, हिरण आदि  के बारे में जानते थे, परन्तु वे शेर के बारे में नहीं जानते थे। 6. गैंडा सबसे प्रमुख पशु था, यहाँ के लोग घोड़े के बारे में नहीं जानते थे। 7. हडप्पा के लोग कपास उ...

Ancient India, Indus Valley Civilization 3300 to 1300 B.C. प्राचीन भारत , सिंधु घाटी सभ्‍यता 3300 से 1300 ई.पू.

                                                     सिंधु घाटी सभ्‍यता  परिचय 1. सिंधु घाटी सभ्यता दक्षिण एशिया के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में स्थित एक कांस्य युगीन सभ्यता थी। प्राचीन  मिस्त्र एवं मेसोपोटामिया को सम्मिलित करते हुए यह विश्व की तीन प्राचीनतम सभयताओं में से एक थी।  दयाराम साहनी के निर्देशन में 1921 में हडप्पा नामक स्थल पर पहली बार उत्खन्न कार्य प्रांरभ किया गया  था, अत: इसे हडप्पा सभ्यता भी कहा जाता है। 2. इस सभ्यता का विस्तार पश्चिम दिशा में बलुचिस्तान के सुत्कागेन्डोर, पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर  प्रदेश), दक्षिण में दायमाबाद (महाराष्ट्र) एवं उत्तर में मंदा (जम्मू कश्मीर) तक फैला हुआ है।                                                       हडप्‍पा 1....

Demonstrations of 500 and 1000 rupees notes in India भारत मे 500 और 1000 रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण

भारत मे 500 और 1000 रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण भारत के 500 और 1000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण , जिसे मीडिया में छोटे रूप में   नोटबंदी   कहा गया , की घोषणा  8 नवम्बर 2016 को रात आठ बजे (आईएसटी)   भारतीय प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी   द्वारा अचानक राष्ट्र को किये गए  संबोधन के द्वारा की गयी।   यह संबोधन टीवी के द्वारा किया गया। इस घोषणा में 8 नवम्बर की आधी रात से देश  में 500 और 1000 रुपये के नोटों को खत्म करने का ऐलान किया गया। इसका उद्देश्य केवल   काले धन   पर  नियंत्रण ही नहीं बल्कि   जाली नोटों   से छुटकारा पाना भी था। पृष्ठभूमि कुछ खबरों के अनुसार , यह योजना छह महीने पहले बननी शुरू हुई थी। सरकार के इस फैसले की जानकारी केवल कुछ लोगों को थी। ये लोग थे- मुख्य सचिव   नृपेंद्र मिश्रा , पूर्व और वर्तमान   आरबीआई गवर्नर , वित्त सचिव   अशोक लवासा , आर्थिक मामलों के सचिव   शक्तिकांत दास   और   वित्त मंत्री   अरुण जेटली। योजना को लागू करने की प्रक्रिया दो ...