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Ancient History of South India दक्षिण भारत का प्राचीन इतिहास

संगम राजवंश  परिचय - भारतीय दक्षिणी राज्यों की सर्वप्रथम विस्तृत जानकारी संगम साहित्य से प्राप्त होती है। - दक्षिण भारत की साहित्यिक भाषाओं एवं बोली जाने वाली भाषाओं में तमिल सबसे प्राचीन भाषा है। - साहित्य सभाओं को संगम कहा जाता था, जो पांडियन राजाओं द्वारा स्थापित की गई थी। - अशोक के रॉक शिलालेख II और XIII से चोल, पांड्या, सत्यपुत्र, केरलपुत्र एवं तम्बापन्नी के दक्षिण  राज्यों का ज्ञान होता है। चोल राजवंश - इन्होने कावेरी नदी के किनारे से सटे हुए क्षेत्र को अधिग्रहित किया। - प्रारंभ में इनकी राजधानी उरीयर थी जो तिरूचिरपल्ली में स्थित थी परन्तु बाद में यह  पूहार(कावेरीपट्टनम) स्थानान्तरित हो गई थी। पूहार मुख्य बंदरगाह था। - पूर्व चोल राजवंश का सबसे विशिष्ट राजा करिकालन था, जिसने तंजौर के निकट वेन्नी के युद्ध में चेरा व   पान्डया की अध्यक्षता वाले लगभग एक दर्जन शासको के एक महासंघ को हराया था। करिकालन ने  एक शक्तिशाली सेना का निर्माण किया एवं श्रीलंका पर विजय प्राप्त़ की। - अंतत: चोल वंश को पल्लवों स...

Ancient India, Eastern Secret प्राचीन भारत , पूर्व गुप्तकाल

शुंग वंश (185 ई.पू. - 75 ई.पू. ) - मौर्य वंश की समाप्ति के पश्चात शुंग वंश अस्तित्व में आया। - ये ब्राहाम्ण वर्ग के लोग थे। - पंतजलि ने पुष्यमित्रशुंग के लिए अश्वमेध यज्ञ करवाया था। - पुष्यमित्र शुंग के बाद उसका पुत्र अग्निमित्र सिंहासन पर बैठा। अग्निमित्र कालिदास के विख्यात नाटक का मुख्य पात्र था। - भागवत के शासनकाल में हेलिओडोरस उसके राजदरबार में आया था। यह अतंलिखित का राजदूत था।  हेलिओडोरस एवं भागवत ने मिलकर बेसनगर स्तंभ का निमार्ण करवाया। - देवभूती इस वंश का अंतिम शासक था एवं इनके बाद कण्व राजवंश अस्तित्व में आया। कण्व राजवंश  (75 ई.पू. - 25 ई.पू. ) - ये भारत के पश्चिमी भाग में स्थित थे। - वासुदेव ने शुंग वंश के अंतिम राजा की हत्या कर सत्ता अपने हाथों में ले ली। - कण्व वंश के बाद सातवाहन का शासनकाल प्रारंभ हुआ। कलिंग के चेत - चेत राजवंश के तृतीय सम्राट के काल में कलिंग की शक्ति में वृद्धि हुई। - यह भुवनेश्वर में उदयगिरि की पहाडियों में स्थिति हाथीगुफा शिलालेख से ज्ञात होता है। विदेशी साम्राज्य हिन्द ...