State executive and state legislature ,Local government ] राज्य कार्यकारिणी और राज्य विधायिका , स्थानीय सरकार
स्थानीय सरकार
परिचय
- राज्य विधानसभा तीन स्तरीय
व्यवस्था – ग्राम स्तर पर, मध्यवर्तीस्तर पर व जिला स्तर पर स्थानीय
सरकार की व्यवस्था कर सकती है।
- संविधान का अनुच्छेद 40 राज्य को स्वशासन की
इकाई के रूप में ग्राम पंचायतों के गठन के लिए निर्देशित करता है।
- संविधान में 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 और 74वां संविधान संशोधन
अधिनियम 1992 को भाग IX (पंचायत) और भाग IX – A (नगरपालिकाएँ) में जोड़ा गया
है।
- सामुदायिक विकास कार्यक्रम 2 अक्टुबर 1952 को शुरू किया गया।
- राजस्थान पहला राज्य था
जिसने पंचायती राजव्यवस्था को शुरू किया, इसका उद्घाटन जवाहरलाल
नेहरू ने किया, इसके बाद आंध्र प्रदेश ने पंचायती राज की शुरूआत की।
- पंचायतीराज की मुख्य
अवधारणा यह थी कि ग्रामीण खुद के सामाजिक, आर्थिक हितों को सोचे और
निर्णय करें। अत: पंचायतीराज अधिनियम गांव के स्वशासन से सम्बंधित है।
- ग्राम पंचायत का चैयरमेन
ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा चुना जाता है जो ब्लॉक कांउसिल (पंचायत समिति)
में सदस्य के रूप में कार्य करता है।
- एक ब्लॉक जिले की सबसे
बड़ी ईकाई होती है। कुछ राज्यों में ब्लॉंक को तालुक या तहसील भी कहते है। अन्य
राज्यों में तालुक या तहसीलें, ब्लॉकों में विभक्त होती है।
- जिला परिषद् इस व्यवस्था
का उच्च स्तर है।
चुनाव
- पंचायतो के सभी सदस्य चाहे
वे गाँव,
मध्यम या जिला स्तर के सदस्य हो, लोगों द्वारा प्रत्यक्ष
रूप से चुने जायेगें।
- पंचायती राज में मध्यम स्तर
व जिला स्तर पर चेयरपर्सन (अध्यक्ष), चुने हुए प्रतिनिधियों (सदस्यों) द्वारा अप्रत्यक्ष
तरीके से चुना जाता है।
- पंचायत का गाँव स्तर पर
चेयरमेन चुनने का तरीका राज्य विधानसभा निर्धारित करती है।
सीटो का आरक्षण
- पंचायतों में कुछ सीटें SC, ST और महिलाओं के लिए आरक्षित
होती है। ST / SCs की आरक्षित सीटें पंचायत की कुल जनसंख्या में से ST / SCs की जनसंख्या के अनुपात के
हिसाब से होती है।
- कुल सीटों की 1/3 सीटें महिलाओं के लिए
आरक्षित होती है। इसमें ST / SC की आरक्षित सीटें भी शामिल होती है।
जवाबदेही / जिम्मेदारी
पंचायत की दो मुख्य जिम्मेदारियां होती है
- आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय
के लिए योजना तैयार करना
- इन योजनाओं को लागू करना
शक्तिया व अधिकार
- राज्य विधानसभा पंचायत को
उगाही करने, उचित कर लगाने, टोल व फीस एकत्रित करने के अधिकार प्रदान कर सकती
है।
- राज्य की संचित निधि के
निर्माण के लिए पंचायतों को इसके लिए अधिकृत किया जा सकता है।
- इस निधि का उपयोग योजनाओं
को लागू करने में किया जा सकता है।
ग्रामसभा (योग्य मतदाताओं का कॉलेज)
- पंचायतीराज व्यवस्था की
स्थापना के लिए ग्राम सभा का गठन आवश्यक है।
- यह एक ऐसा निकाय है जिसमें
गाँव स्तर पर पंजीकृत मतदाताओं को शामिल किया जा सकता है।
- यह अपनी शक्तियों का गाँव स्तर
पर उसी तरह से उपयोग करती है जिस तरह से राज्य विधानसभा इसको निश्चित करती है।