राज्य विधायिका
परिचय
- राज्य विधानसभा में राज्यपाल
और एक या दो सदन शामिल होते है।
- केवल जम्मू और कश्मीर, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर पद्रेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, में ही द्विसदनात्मक
विधायिका है मतलब विधानसभा और राज्य सभा दोनों
- अनुच्छेद 169 के अनुसार विधान परिषद को
विधानसभा की अनुशंसा पर संसद द्वारा एक सामान्य अधिनियम को पारित कर बनाया या
समाप्त किया जा सकता है।
- विधानसभा में कम से कम 60 सीटें और अधिकतम 500 सीटें हो सकती है।
- लेकिन सिक्किम में 32, मिजोरम में 40, गोवा में 40 व पांडिचेरी में 40 ही सीटें हैं ।
- विधानपरिषद् उच्च सदन होता
है। विधान परिषद् में सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों की संख्या का 1/3 भाग से अधिक नहीं होनी
चाहिए और 40 से कम भी नहीं होना चाहिए।
राज्य विधानपरिषद के सदस्य निम्नलिखित तरीकों से चुने जाते है:
1. नगरपालिकाओं, जिला बोर्डो और स्थानीय
प्रशासन (अधिकारियों) आदि के सदस्यों द्वारा 1/3 सदस्य चुने जायेगें।
2. विधानसभा के सदस्यों
द्वारा 1/3 सदस्य चुने जायेगें।
3. विश्वविद्यालय के स्नातकों
में से 1/12 सदस्य चुने जायेगें।
4. बचे हुए (1/6 सदस्य) राज्यपाल द्वारा
मनोनीत किये जाते है।
सामान्यत: विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है जबकि
विधानपरिषद का विलय नहीं होता है लेकिन प्रत्येक दो वर्ष में इसके 1/3 सदस्य सेवामुक्त हो जाते
है।
राज्य विधानसभा सदस्य बनने के
लिए योग्यताएं
- भारतीय नागरिक होना चाहिए।
- 25 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली
हो।
- संसद के समकक्ष योग्यताएँ
जो कानून द्वारा निर्धारित हो
- विधान परिषद का सदस्य बनने
के लिए आयु 30 वर्ष या अधिक होनी चाहिए और अन्य योग्यताएँ वही है जो ऊपर दी गयी
है।