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State executive and state legislature , Governor राज्‍य कार्यकारिणी और राज्‍य विधायिका , राज्यपाल

राज्‍य कार्यकारिणी और राज्‍य विधायिका


राज्‍यपाल  


परिचय

- अनुच्‍छेद 153 के अनुसार प्रत्‍येक राज्‍य में एक राज्‍यपाल होगा। एक ही व्‍यक्ति को एक ही समय दो या दो से अधिक राज्‍यों का राज्‍यपाल नियुक्‍त किया जा सकता है।
- राज्‍य की समस्‍त कार्यकारिणी शक्तियाँ राज्‍यपाल के पद में निहित होती है (अनुच्‍छेद 154)
- राज्‍य का राज्‍यपाल राष्‍ट्रपति द्वारा नियुक्‍त किया जाता है व राष्‍ट्रपति के प्रसादपर्यन्‍त अपने पद पर बना रहता है।

राज्यपाल के पद के लिए योग्यता

- वह भारत का नागरिक होना चाहिए।

- उसने 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो।

- वह किसी भी लाभकारी पद पर कार्यरत न हो।

- राज्‍यपाल का वेतन, भत्ता राज्‍य की संचित निधि पर भारित होता है। यदि एक ही व्‍यक्ति को दो या अधिक राज्‍यों का राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है तो उसे मिलने वाले वेतन और भत्ते दोनों राज्‍यों में एक निश्चित अनुपात में बाँटे जाते है और इसका निर्धारण भारत का राष्‍ट्रपति करता है।

- यदि संसद का सदस्‍य या राज्‍य विधानसभा का सदस्‍य राज्‍यपाल नियुक्‍त किया जाये तो सम्‍बंधित सदन में उसकी सीट रिक्‍त ही रखी जाती है।

- राज्‍यपाल राज्‍य सरकार में मुख्‍यमंत्री व अन्‍य मंत्री, महाधिवक्‍ता, राज्‍य लोक सेवा आयोग के सदस्‍य, विधानसभा में एंग्‍लो इंडियन समुदाय का एक सदस्‍य नियुक्‍त करता है।

- राज्‍यपाल राज्‍य लोक सेवा आयोग के सदस्‍यों का नहीं हटा सकता है लकिन उन्‍हें निलंबित कर सकता है और सुप्रीम कोर्ट से जांच करा कर उन्‍हें पद से लंबित कर सकता है।

- राज्‍यपाल राज्‍य विधान परिषद के 1/6 सदस्‍य मनो‍नीत कर सकता है, ऐसे व्‍यक्तियों को जिन्‍हें साहित्‍य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा का विशेष ज्ञान या अनुभव हो।

- राज्‍य के निर्वाचन आयुक्‍त को राज्‍यपाल द्वारा नियुक्‍त किया जाता है।

- वह भारत के निर्वाचन आयोग से परामर्श कर राज्‍य विधानसभा के सदस्‍यों को अयोग्‍य ठहराए जाने के सवाल पर फैसला करता है।

राज्यपाल द्वारा बिलो को मंजूरी

- विधानसभा द्वारा पारित बिलों को स्‍वीकृति प्रदान करने सम्‍बंधी चार विकल्‍प राज्‍यपाल के पास खुले हुए है।
- राज्‍यपाल
1. स्‍वीकृति दे सकता है।
2. अपनी स्‍वीकृति रोक सकता है।

3. राष्‍ट्रपति की सलाह के लिए विधेयक (बिल) को आरक्षित रख सकता है।

4. बिल को पुनर्विचार के लिए अपने संदेश के साथ लौटा सकता है यदि यह एक धनविधेयक नहीं है तो।

5. राज्‍यपाल ऐसे बिलों को राष्‍ट्रपति से विचार विमर्श के लिए अपने पास सुरक्षित रख सकता है जिन्‍हें राज्‍य विधानसभा ने पारित किया है और जो राज्‍य उच्‍च न्‍यायालय की कार्यवाही में बाधक बन सकते है। (अनुच्‍छेद 200)

- जब राज्‍य विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा हो तब राज्‍यपाल अनुच्‍छेद 213 के अन्‍तर्गत अध्‍यादेश जारी कर सकता है।

- उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीशों को नियुक्‍त करते समय राष्‍ट्रपति राज्‍यपाल की सलाह आवश्‍यक रूप से लेता है।

- राज्‍यपाल राज्‍य के सभी विश्‍वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है और वह राज्‍य के विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति करता है।

- वह राज्‍यविधान मंडल के समक्ष राज्‍य का बजट प्रस्‍तुत करता है। (अनुच्‍छेद 202)

- राज्‍य विधानसभा में धन विधेयक प्रस्‍तुत करने से पहले उसकी अनुमति आवश्‍यक होती है। (अनुच्‍छेद 207)
- राज्‍यपाल मृत्‍युदण्‍ड व सैन्‍य अपराधों को छोड़कर अन्‍य सभी सजाएँ माफ कर सकता है।

राज्‍यपाल निम्‍नलिखित मामलों में संवैधानिक निर्णय ले सकता है

1. राष्‍ट्रपति से परामर्श करने के लिए किसी भी बिल को आरक्षित रख सकता है।

2. राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगाने के लिए राष्‍ट्रपति को कह सकता है।

3. राज्‍य में प्रशासनिक व विधायी मामलों में मुख्‍यमंत्री से (जानकारी) सूचना मांग सकता है।

4. राष्‍ट्रपति द्वारा दी गयी विशेष जिम्‍मेदारियों का उपयोग करते हुए, राज्‍यपाल मंत्रीपरिषद का सिफारिशों को मानने के लिए बाध्‍य नहीं होता है।

5. राज्‍य में मुख्‍यमंत्री का पद वही है जो केन्‍द्र में प्रधानमंत्री का है।




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