संसद
परिचय
- अनुच्छेद 79 के अनुसार संघ के लिए एक संसद होगी जिसके अंतर्गत राष्ट्रपति, दोनों सदन अर्थात उच्च सदन (राज्य सभा) एवं निम्न सदन (लोक सभा) सम्मिलित होंगे।
- संसद कानून का निर्माण करती है।
- संसद कार्यपालिका पर वित्तीय नियंत्रण रहती है एवं इसके पास समस्त करों को बढानें का अधिकार है।
- कुल सदस्य संख्या
250 अधिकतम
a. 238 निर्वाचित (अधिकतम)
b. 12 मनोनीत (अधिकतम)
- वर्तमान में संख्या
245 अधिकतम
a. 233 निर्वाचित
b. 12 मनोनीत
- राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किये जाने वाले व्यक्ति साहित्य, कला, विज्ञान, सामाजिक सेवाएँ एवं खेलकूद के क्षेत्र में विशिष्ट अनुभव रखने वाले होते है।
- राज्य सभा में प्रत्येक राज्य अपने प्रतिनिधियों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल हस्तांतणीय मत प्रणाली के तहत करते है।
- राज्य सभा स्थाई सदन है एवं प्रत्येक दो वर्ष में रोटेशन के आधार पर एक – तिहाई सदस्य सेवानिवृत हो जाते है।
- भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन अध्यक्ष होता है।
- राज्यसभा का उपाध्यक्ष इसके सदस्यों द्वारा अपने सदस्यों में से चुना जाता है।
राज्य परिषद या राज्य सभा
राज्यसभा मे अधिकतम सदस्य संख्या
उत्तर प्रदेश (31) : महाराष्ट्र (19)
- कुछ प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही पेश किये जा सकते है।
(i)उपराष्ट्रपति को पदच्युत करने से संबंधित प्रस्ताव (अनुच्छेद 67)
(ii)एक या एक से अधिक अखिल भारतीय सेवाओं के निर्माण से सम्बंधित प्रस्ताव (अनुच्छेद 312)
(iii)राज्य सूची के किसी भी विषय पर कानून बनाने से सम्बंधित प्रस्ताव (अनुच्छेद 249)
राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए
योग्यता
- वह भारत का नागरिक हो।
- उसकी आयु 30 वर्ष से कम नहीं हो।
- उसने कोई लाभकारी पद धारण नहीं कर रखा हो।
- वह जिस संघ शासित क्षेत्र या राज्य से निर्वाचित होना चाहता है तो उसे वहाँ का आम नागरिक होने के साथ उस क्षेत्र का एक पंजीकृत मतदाता भी होना चाहिए।
लोक सभा
1. अनुच्छेद 81 के अनुसार
अधिकतम संख्या
552 सदस्य
» 530 राज्यों से
» 20 संघ शासित प्रदेशों से
» 2 आंग्ल - भारतीय समुदाय से मनोनीत
2. वर्तमान में सदस्य
संख्या
545 सदस्य
» 530 राज्यों से
» 13 संघ शासित प्रदेशों से
» 2 राष्ट्रपति से मनोनीत
- कार्यकाल = 5 वर्ष (राष्ट्रपति चुनाव नहीं होने की स्थिति में संसद का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ा सकता है।)
- लोकसभा का स्पीकर लोकसभा का मुख्य पीठासीन अधिकारी होता है।
- लोकसभा के अध्यक्ष का चयन नई लोकसभा के गठन के पश्चात इसके सदस्यों द्वारा किया जाता है।
- सदन की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी उसकी होती हैं एवं उसको सभी विशेषाधिकार प्राप्त होते है।
- नई लोक सभा के गठन के तुंरत बाद राष्ट्रपति एक अस्थाई अध्यक्ष की नियुक्ति करता है जो कि सदन का वरिष्ठतम सदस्य होता है। वह अध्यक्ष के रूप में तब तक कार्य करता है जब तक कि स्थाई अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता ।
- सत्ता दल के बाद जिस दल की सदस्य संख्या अधिकतम होती है और जिसकी सदस्य संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का 1/10 भाग है, तो वह दल प्रतिपक्ष दल नियुक्त किया जा सकता है।
- नेता प्रतिपक्ष ,का स्तर एक कैबिनेट मंत्री के बराबर होता है और उसे वे सभी सुविधायें प्राप्त होती है जो एक कैबिनेट मंत्री को दी जाती है।
अधिकतम सदस्य संख्या
» उत्तर प्रदेश (80)
» महाराष्ट्र (48)
» पश्चिम बंगाल (42)
3. लोकसभा सदस्य
निर्वाचित होने के लिए योग्यताऍ
- वह भारत का नागरिक हो।
- वह 25 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
- उसने कोई लाभ का पद ग्रहण न किया हो।
- वह भारत के किसी भी संसदीय क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता होना चाहिए।
4. संसद के सत्र
संसद के दो सत्रों के मध्य अंतराल 6 माह (अधिकतम) से अधिक नहीं होना चाहिए अर्थात संसद के प्रत्येक वर्ष में कम से कम दो सत्र होने आवश्यक है।
वर्तमान में सामान्यत: संसद के तीन सत्र होते है
ये सत्र हैं
- बजट सत्र (फरवरी से मार्च)
- मानसून सत्र (जुलाई से सितंबर)
- शीतकालीन सत्र (नवम्बर से दिसंबर)
5. संयुक्त बैठक
- अनुच्छेद 108 के अन्तर्गत संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान है।
- संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है। यदि लोकसभाध्यक्ष सदन में अनुपस्थित हो तो राज्यसभा का उपाध्यक्ष संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है।
वर्तमान समय तक हुई संयुक्त बैठकों की संख्या = 03
- मई 1961 में, दहेज निषेध बिल (1961) के संदर्भ में
- मई 1978 में, बैंकिंग सेवा आयोग के संदर्भ में
- मार्च 2003 में, पोटा बिल के संदर्भ में
- धन विधेयक एवं संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में हुए टकराव को दुर करने के लिए संसद की संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती।
- प्रत्येक आम चुनाव के बाद होने वाले पहले सत्र को राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक में संबोधित किया जाता है।
6. सत्र की समाप्ति
1. सत्रावसान
- जब सत्र का विषय पूर्ण हो जाता है तो लोकसभाध्यक्ष द्वारा सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित घोषित कर दिया जाता है।
- अगले कुछ दिनों के भीतर राष्ट्रपति सत्र के सत्रावसान के लिए एक अधिसूचना जारी करता है।
- राष्ट्रपति सदन को सत्र के दौरान भी सत्रावसान कर सकता है।
2. स्थगन
- यह संसद के सत्र के दौरान एक अल्पकालीन समय अंतराल होता जो सदन के पीठासीन अधिकारी द्वारा घोषित किया जाता है। इसकी अवधि कुछ मिनटों से लेकर कुछ दिनों तक भी हो सकती है।
3. अनिश्चितकालीन स्थगन
- यह एक प्रकार का स्थगन है जिसमें पीठासीन अधिकारी द्वारा अगले सत्र का समय या दिनांक दिए बिना ही सत्र का स्थगन कर दिया जाता हैं।
4. गणपूर्ति
- गणपूर्ति सदस्यों की वह कम से कम संख्या है जो सदन में किसी भी विषय पर बहस/कार्य करने के लिए उपस्थित होना जरूरी है।यह प्रत्येक सदन की कुल सदस्यों की संख्या का 1/ 10 भाग होती है (पीठासीन अधिकारी / अध्यक्ष सहित)
लोकसभा के लिए :- 55 सदस्य
राज्य सभा के लिए :- 25 सदस्य
आधिकारिक भाषा :- हिंदी, अंग्रेजी, मातृभाषा
7. संसद में प्रस्तुत
होने वाले विधेयकों (बिल) के प्रकार
- कानूनी प्रक्रिया एक विधेयक(बिल) के रूप में आंरभ की जाती है, जब एक विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया जाता है एवं राष्ट्रपति द्वारा उसे स्वीकृति प्रदान कर दी जाती है तो वह कानून(नियम)का रूप ले लेती है।
8. विधेयकों की श्रेणियॉ
1. साधारण बिल
- ये विधेयक, वित्त विधेयक, धन विधेयक एवं संविधान संशोधन विधेयक को छोडकर अन्य किसी भी विषय से संबंधित हो सकते हैं।
- ऐसे विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किये जा सकते हैं वह भी बिना राष्ट्रपति की अनुमति के। ऐसे विधेयक साधारण बहुमत से दोनों सदनों में परित किये जाते है।
2. धन विधेयक
- राष्ट्रपति की अनुमति के बाद धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। बाद में यह विधेयक राज्यसभा को भी भेजा जाता है। यदि राज्यसभा इस विधेयक को खारिज या वापस भेजती है (14 दिनों के अंदर) तब भी यह विधेयक पारित माना जाता है।
- विनियोग विधेयक एवं वार्षिक वित्तीय विधेयक (बजट) धन विधेयक के उदाहरण है।
3. वित्त विधेयक
- कोई भी विधेयक जो कि राजस्व एवं व्यय से संबंधित है, परन्तु वह लोकसभाध्यक्ष द्वारा धन विधेयक घोषित न किया गया हो, वित्त विधेयक होता है।
- वित्त विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है एवं दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से पारित किया जाता है।
4. संविधान संशोधन विधेयक
- अनुच्छेद 368 के अनुसार, संविधान संशोधन की शक्ति संसद में निहित है। यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना दोनों में से किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- ऐसे विधेयक प्रत्येक सदन द्वारा एक विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक है। (दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति होनी चाहिए एवं वोटिंग पूर्ण बहुमत से अधिक होना चाहिए)
- 24वें संविधान संशोधन अधिनियम 1971 के तहत राष्ट्रपति को संविधान संशोधन विधेयकों पर सहमति देना अनिवार्य हो गया है।
9. बहुमत के प्रकार
एक विधेयक को पारित कराने के लिए चार प्रकार के बहुमत है।
1. साधारण बहुमत
50% से अधिक सदस्य उपस्थित होने चाहिए एवं मतदान में भाग लेने चाहिए (मतदान से अनुपस्थित सदस्यों को छोडकर)
2. पूर्ण बहुमत
कुल सदस्यों का 50% से अधिक सदस्य (अनुपस्थित सदस्यों सहित)
3. प्रभावी बहुमत
सदन के प्रभावी सदस्य संख्या के 50% से अधिक (रिक्तियों को छोडकर)
4. विशेष बहुमत
अनुच्छेद 61 के अनुसार सदन की कुल सदस्य संख्या का 2/3 भाग (रिक्तियों सहित)
10. संसदीय पद
लेखानुदान (अनुच्छेद 116 )
जब तक संसद द्वारा विनियोग अधिनियम पारित न हो तब तक लोकसभा भारत की संचित निधि से कार्यकारिणी को कार्य करने के लिए निश्चित सीमा में धन प्रदान कर सकती है एवं इस मुद्दे पर कोई बहस नहीं होती हैं।
प्रश्नकाल घंटा
- दोनों सदन की प्रत्येक बैठक का पहला घंटा प्रश्न पूछने एवं उनका उत्तर देने के लिए रहता है।
- जिसका समय 11 से 12 (दोपहर) तक रहता हैं
प्रश्न तीन प्रकार के है
1. तारांकित प्रश्न
इन प्रश्नों का उत्तर सदन में मौखिक तौर पर देना होता है। पूरक प्रश्न भी पुछे जा सकते है।
2. अतारांकित प्रश्न
इन प्रश्नों के उत्तर लिखित तौर पर देने होते है एवं यहाँ पूरक प्रश्न नहीं पूछे जा सकते हैं।
3. अल्प सूचना प्रश्न
ये प्रश्न लोक महत्व से जुडे होते है और कम से कम 10 दिन के नोटिस पर पूछे जाते है और साधारण प्रश्नों की तरह इनके जवाब दिये जाते है।
शुन्यकाल
- यह एक भारतीय नवाचार है एवं यह 1962 से अस्तित्व में है। यह प्रश्नकाल घण्टा के बाद एवं सत्र की शुरूआत से पहले मध्य का समय है।
- यह दोपहर 12 बजे से आरंभ होकर सामान्यत: 1 बजे तक होता है।
- यहाँ सदस्य, लोक महत्व से संबधित कोई भी मुद्दा बहुत छोटी सुचना/ बिना नोटिस देकर भी उठा सकते है।
अर्ध घण्टे की चर्चा
- इस प्रकार की चर्चा उन प्रश्नों पर की जाती है जिनके जवाब सदन में पहले ही दिये जा चुके होते है और ये चर्चा सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार की बैठकों के आखिरी आधे घंटे में की जा सकती है।
- राज्य सभा में यह किसी भी दिन की जा सकती है।
कटौती प्रस्ताव के प्रकार
1. ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
» एक सदस्य अध्यक्ष की स्वीकृति लेकर किसी भी महत्वपूर्ण लोक महत्व के मुद्दे की तरफ किसी भी मंत्री का ध्यानकर्षित कर सकता है। इस प्रकार की व्यवस्था राज्य सभा में नहीं है इसके समरूप वहाँ ‘’कागज प्रस्ताव’’ है।
2. स्थगन कटौती प्रस्ताव
» यह प्रस्ताव अविलम्बनीय लोकमहत्व के तत्काल मुद्दों पर एवं उनके गंभीर परिणामों की तरफ सदन का ध्यानकर्षित करने के लिए होता है।
इस तरह के प्रस्ताव के लिए सदन के अध्यक्ष की सहमति के साथ 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
3. निंदा प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव
» यह मंत्रालय में अविश्वास की अभिव्यक्ति है।
» इस प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
4. समापन प्रस्ताव
» किसी भी सदस्य द्वारा किसी भी विषय पर हो रहे लघु वार्तालाप को रोकने के लिए इस प्रस्ताव का उपयोग किया जा सकता है।
5. कटौती प्रस्ताव: यह तीन प्रकार का हो सकता है
- पॉलिसी कटौती प्रस्ताव : यह नीति (पॉलिसी) को अस्वीकृत करता है एवं धनराशि को एक रूपया कम करने का प्रस्ताव रखता है।
- आर्थिक कटौती प्रस्ताव : यह किसी प्रोजेक्ट के लिए पारित होने वाले वित्त में से एक विशिष्ट राशि को (कुल राशि में से) कम करने से सम्बंधित है।
- टोकन कटौती प्रस्ताव : यह कुल राशि में से 100 रूपये कम करना होता है। इसका उद्देश्य उस विशेष शिकायत की तरफ ध्यानकर्षित करना है जिसके लिए सरकार जिम्मेदार है।
विशेष उल्लेख
जिस मुद्दे को संसद के किसी भी नियम के अन्तर्गत नहीं उठाया जा सकता, उसे राज्यसभा में विशेष उल्लेख नियम के तहत उठाया जा सकता है।
गिलोटिन
विभिन्न मंत्रीयों के लिए “अनुदान माँग” बिना किसी चर्चा के ही लोकसभा द्वारा स्वीकृत कर ली जाती है। ऐसा समय की कमी के कारण किया जाता है।
सरकार के प्रकार
1. कार्यवाहक सरकार - सामान्यत: निर्वाचन के बाद जब तक नई सरकार सत्ता को अपने हाथ में नहीं लेती है, तब तक पुरानी सरकार का ही कार्यकाल चलता रहता है।
2. अंतरिम सरकार - भारत में अंतरिम सरकार 15 अगस्त के दिन भारतीय स्वंतत्रता अधिनियम, 1947 के द्वारा सत्ता में आई थी एवं मार्च 1952 तक इसने कार्य किया। यह पूर्ण रूप से एक एकाधिकार सरकार थी एवं कोई भी नीति पर निर्णय लेने में सक्षम थी।
3. अल्पमत सरकार - वह सरकार जिसे लोकसभा में पुर्ण विश्वास प्राप्त नहीं होता है एवं जो सरकार के बाहर दुसरे राजनीतिक पार्टियों के सहयोग पर निर्भर रहती है।
4. गठबंधन सरकार - जब दो या दो से अधिक राजनीतिक दल मिलकर, किसी निश्चित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार बनाते है।
5. राष्ट्रीय सरकार - यह आमसहमति या गंठबंधन के आधार पर बनी सरकार होती है जिसमें सभी राजनीतिक दल बिना किसी विरोध के भाग लेती है।
इस प्रकार की सरकार 1940 में ब्रिटेन में द्वितीय विश्व युद्ध के समय विन्सटन चर्चिल द्वारा बनाई गई थी।
छाया मंत्रीमंडल
- यह एक राष्ट्रीय मंत्रीमण्डल होता है जो कि संसद में मुख्य प्रतिपक्ष पार्टी द्वारा बनाया जाता है जिसमें सदस्यों को कुछ विशिष्ट कार्य आवंटित किये जाते है।
- ये सदस्य ही संसद में विचार विमर्श के दौरान विपक्षी दल का नेतृत्व करते है।
- इसे “केबिनेट
– इन – वेटिंग” भी कहा जाता है।
हंग संसद
जब कोई भी राजनीतिक दल या राजनीतिक दलों का समूह गठबंधन द्वारा चुनाव से पहले सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होता है।
संसदीय समितीया
ये दो प्रकार की होती है
1. स्थाई समिति
2. तदर्थ समिति
1. स्थाई समिति - स्थाई समिति प्रत्येक वर्ष या समयानुसार चुनी /नियुक्त की जाती है एवं उनका कार्य लगातार जारी रहता है।
2. तदर्थ समिति - तदर्थ समिति को तदर्थ आधार पर आवश्यकतानुसार नियुक्त की जाती है एवं ये तब मौजूद रहती है जब तक कि इन्हें दिया हुआ कार्य पुर्ण नहीं हो जाता।
- यदि सदन का अध्यक्ष या पीठासीन अधिकारी स्वयं इस समिति का सदस्य होता है तो वह इस समिति का अध्यक्ष माना जाता है। यदि वह इसका सदस्य नहीं है, परन्तु सदन का उपाध्यक्ष समिति में शामिल है तो उसे बाद में उस समिति का सभापति नियुक्त किया जाता हैं।
- मंत्री न तो वित्तिय समितियों के सदस्य होते हैं न ही उन्हें समितियों के सामने सबुत देने के लिए बुलाया जा सकता है।
महत्वपुर्ण संसदीय समितीया
प्राक्कलन समिति
- प्रथम प्राक्कलन समिति का गठन 1950 में जॉन मथाई (तत्कालीन वित्त मंत्री) की सिफारिश के आधार पर हुआ था।
- इसमें कुल 30 सदस्य होते हैं एवं ये सभी लोकसभा से संबंधित होते हैं।
- मंत्रियों को इसका सदस्य नियुक्त नहीं किया जा सकता।
- इस समिति का कार्य इस बात की जाँच करना है कि धन नीतियों पर सीमा से से ज्यादा तो धन खर्च नहीं हो रहा है।
लोक लेखा समिति
1964 में कृष्णा मेनन की सिफारिश पर गठित की गई थी
कुल सदस्य 22
1. 15 लोकसभा से
2. 7 राज्सभा से
- एक मंत्री इसका सदस्य निर्वाचित नहीं हो सकता।
- विपक्षी दल का नेता इसका अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है।
- इस समिति का कार्य वार्षिक वित्तिय खातों की जाँच करना एवं कैग (CAG) द्वारा दी गयी राजस्व रिपोर्टों की जाँच करना है।
लोक उपक्रम समिति
- इसका गठन लोक लेखा समिति की तरह ही होता है।
- केवल लोकसभा का सदस्य ही इसका अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है।
- इसका कार्य सार्वजिक उपक्रमों की रिपोर्टों एवं खातों पर नजर रखना और उनकी कार्यप्रणाली एवं कमियों की जाँच करना है।
अनुसूचित जाति एवं
अनुसूचित जनजाति के कल्याण संबंधी समिति
कुल सदस्य 30
1. 20 लोकसभा से
2. 10 राज्सभा से
- कोई भी मंत्री न तो इसके सदस्य बन सकते हैं और न हीं अध्यक्ष ।
व्यावसायिक सलाहकार समिति
- प्रत्येक सदन में इस प्रकार की एक समिति होती है।
- लोकसभा में इस समिति में लोकसभाध्यक्ष सहित कुल 15 सदस्य होते है।
- राज्य सभा में इस समिति में राज्यसभा उपाध्यक्ष सहित 11 सदस्य होते हैं ।
- राज्य सभा का अध्यक्ष इसका पदेन अध्यक्ष होता हैं ।
नियम समिति
- प्रत्येक सदन में एक इस प्रकार की समिति होती है।
- इसमें पीठासीन अधिकारी को सम्मिलित करते हुए लेाकसभा में 15 सदस्य एवं राज्य सभा में 16 सदस्य होते है। राज्यसभा का अध्यक्ष इस समिति का पदेन अध्यक्ष होता है।