भारत में कराधान
भारत मे कर प्रणाली
- भारत में कर प्रणाली
के लिए एक अच्छी
तरह से विकसित संरचना
है। जो केन्द्र, राज्य
सरकारों और स्थानीय निकायों
के बीच स्पष्ट रूप से विभाजित
है। केन्द्र
सरकार व्यक्ति
और संस्थाओं से कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर वसूलती है। प्रत्यक्ष कर में व्यक्तिगत आयकर, संपत्ति
कर और निगम कर शामिल है जबकि अप्रत्यक्ष कर में बिक्री कर, उत्पाद शुल्क,
कस्टम ड्यूटी
(राजस्व शुल्क)
और सर्विस
टैक्स (सेवा
कर) शामिल
है।
- वैल्यू एडेड
टैक्स (वैट),
स्टाम्प ड्यूटी,
राज्य उत्पाद
शुल्क, भू-राजस्व कर और पेशा
कर राज्यों
द्वारा लगाया
जाता है। स्थानीय निकाय:
संपत्ति, चुंगी
और पानी
की आपूर्ति,
जल निकासी
आदि की उपयोगिताओं के लिए कर लगाने का अधिकार रखती
हैं। भारतीय
कराधान प्रणाली
में पिछले
एक दशक के दौरान
जबरदस्त सुधार
आया है। कर की दरों को तर्कसंगत बनाया
गया है और कर प्रणाली को सही तरीके
से लागू
करने के लिए कर कानूनों को बेहतर बनाया
गया है। कर प्रशासन
को युक्तिसंगत बनाने की प्रक्रिया भारत
में बहुत
तेज गति से चल रही है।
प्रत्यक्ष कर
प्रत्यक्ष कर (आयकर, संपत्ति
कर, निगम
टैक्स आदि)
के मामले
में, बोझ सीधे करदाता
पर पड़ता
है। ये वह कर है जिनको
करदाताओं द्वारा
दूसरों पर स्थानांतरित नहीं
किया जा सकता है।
आयकर
आयकर अधिनियम
1961, के अनुसार
वह हर व्यक्ति, जो एक कर दाता है और जिनकी
कुल आय अधिकतम छूटसीमा
से अधिक
है। वित्त
अधिनियम में निर्धारित दर से आयकर
के दायरे
में आता है। इस तरह आयकर
पिछले वर्ष
की कुल आय पर भुगतान किया
जाता है।
निगम कर
यह कर कंपनी की शुद्ध आय पर लगाया
जाता है। विवरण:- वे कंपनियां (निजी
और सार्वजनिक) दोनों जो भारत में कंपनी अधिनियम
1956 के तहत पंजीकृत है वे सभी कर का भुगतान करने
के लिए उत्तरदायी हैं।
आकलन वर्ष
2014-15 के लिए घरेलू कंपनियों पर 30% की दर से कर लगाया
गया है।
एक कंपनी
परिचय
एक कंपनी
वह कानूनी
व्यक्ति है जो स्वतंत्र और पृथक
रुप से अपने शेयरधारकों से अलग कानूनी इकाई
के रुप में जानी
जाती है। कंपनी की आय की गणना की जाती है और इसका
मूल्यांकन कंपनी
के हाथों
में अलग से किया
जाता है। हालांकि कंपनी
की आय को उनके
शेयरधारकों में लाभांश के रूप में वितरित किया
जाता है, जिसे उनके
अलग-अलग हाथों में मूल्यांकन किया
जाता है। आय का इस तरह का वितरण
कंपनी के व्यय के रूप में नहीं माना
जाता है; वितरित की गई आय कंपनी के मुनाफे का विनियोग होता
है।
एक कंपनी
से संबंधित
करों के विभिन्न प्रकार
1. न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट)
2. फ्रिंज बेनिफिट
टैक्स (एफबीटी)
3. लाभांश वितरण
कर (डीडीटी)
4. बैंकिंग नकदी
लेनदेन कर (बीसीटीटी)
5. प्रतिभूति लेनदेन
कर (एसटीटी)
संपत्ति कर
संपत्ति कर, यह कर भारत में संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के तहत लगाया
जाता है। संपत्ति से कमाए हुए लाभ पर लगने वाले
कर को संपत्ति कर के रुप में जाना
जाता है। इस कर को साल दर साल बाजार मूल्य
के अनुसार
संपत्ति पर लगाया जाता
है। चाहे
ऐसी संपत्ति
से आय अर्जित हो या न हो। अधिनियम
के तहत यह कर निम्नलिखित व्यक्तियों पर निर्धारण वर्ष के दौरान लिया
जाता है।
1. व्यक्ति
2. हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ)
3. कंपनी
अप्रत्यक्ष कराधान
अप्रत्यक्ष कर वह कर होते हैं जो करदाताओं द्वारा दूसरों
पर स्थानांतरित किया जा सकता हैं।
यदि केंद्र
सरकार ने विभिन्न सेवाओं
पर सेवा
कर की दर बढ़ाती
है तो विक्रेता इस वृद्धि को सेवा लेनेवाले अंतिम उपभोक्ताओं पर हस्तांतरित कर देता
है। बिक्री
कर, माल की बिक्री
पर लगाया
जाता है । यह दो प्रकार
का हो सकता हैं;। केंद्रीय बिक्री कर और राज्य
बिक्री कर
वैल्यू एडेड
टैक्स (वैट)
वैट वह कर है जो उत्पादन
के कई स्तरों पर लगाया जाता
है। वस्तुओं
का मूल्य
जिस तरह से हर चरण पर बढ़ता जाता
है, यह कर उसी चरणबद्ध तरीके
से लगाया
जाता है। राज्य स्तर
पर वैट की शुरूआत
सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार
है। राज्य
स्तर पर लगनेवाले वैट ने राज्य
बिक्री कर का स्थान
लिया है। देश में इस कर की शुरुआत
1 अप्रैल 2005 से हुई थी।
उत्पाद कर
भारत में विनिर्मित वस्तुओं
पर लगने
वाले अप्रतय्क्ष कर को केंद्रीय उत्पाद
कर कहते
हैं। उत्पाद
शुल्क योग्य
वह वस्तुएं
हैं जो केंद्रीय उत्पाद
शुल्क अधिनियम
में निर्दिष्ट की गई हैं
भारत में एकत्र केंद्रीय उत्पाद शुल्क
के तीन प्रकार हैं
1. बेसिक एक्साइज
ड्यूटी
केंद्रीय उत्पाद
व साल्ट
अधिनियम 1944 की धारा 3 के तहत वस्तुओं
पर कर लगाया जाता
है। इसके
अंतर्गत नमक को छोड़कर
भारत में निर्मित वस्तुओं
पर कर वसूला जाता
है। ये सभी केंद्रीय उत्पाद शुल्क
अधिनियम 1985 में सूचीबद्ध होती
हैं।
2. आबकारी का अतिरिक्त शुल्क
उत्पाद शुल्क
(विशेष महत्व
का माल)
अधिनियम, 1957 की धारा 3 के तहत अनुसूची
में वर्णित
वस्तुओं के संबंध में कर संग्रह
किया जाता
है। इस कर को बिक्री कर के एवज में लगाया
जाता है और केन्द्र
और राज्य
सरकारों के बीच साझा
किया जाता
है। ये औषधीय और शौचालय से संबंधित सामान,
चीनी व अन्य उद्योग
से जुड़ी
वस्तुओं पर लगाया जाता
है।
3. विशेष उत्पाद
शुल्क
वित्त अधिनियम
1978 की धारा
37 के अनुसार,
जिन वस्तुओं
पर बेसिक
केंद्रीय उत्पाद
व नमक शुल्क अधिनियम
1944 के तहत कर लगाया
जाता है, वे सभी वस्तुएं इसके
अंतर्गत आती है। विशेष
उत्पाद शुल्क
के तहत आनेवाली वस्तुओं
में लगातार
बदलाव होते
रहते है।यह
तय किया
जाता है कि किन वस्तुओं पर कर लगाया
जाएगा या किन पर नहीं।
सीमा शुल्क
- कस्टम या आयात शुल्क
भारत में आयातित माल पर भारत
की केन्द्रीय सरकार द्वारा
लगाया जाता
है। जिस दर से सीमा शुल्क
माल पर लगाया है वह सीमा
शुल्क टैरिफ
के तहत निर्धारित माल के वर्गीकरण पर निर्भर
करता है। सीमा शुल्क
टैरिफ आम तौर पर नामकरण के एसएसएल प्रणाली(HSL)के तहत लगाया जाता
है।
- सीमा शुल्क
को संरेखित
करते हुए आसियान के स्तर पर लाये जाने
की बात भारत में हो रही है। कृषि
उत्पादों के अलावा अन्य
सभी उत्पादों पर केंद्र
सरकार ने सीमा शुल्क
की दर को 12.5 प्रतिशत
से घटाकर
10 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, केंद्र
सरकार के पास ये अधिकार होता
है कि वह चाहे
तो किसी
विशेष वस्तु
के पूरे
कर को माफ़ कर सकता है।
सेवा कर
सेवा कर की शुरुआत
भारत में
1994 में की गई थी। यह मात्र
3 बुनियादी सेवाओं
पर शुरू
किया गया था। सामान्य
बीमा, स्टॉक
ब्रोकिंग और टेलीफोन पर सेवा कर लगाया गया था। आज काउंटर सेवा
कर 120 से अधिक सेवाओं
पर लागू
किया जा चुका है। इस कर की दर में लगातार
वृद्धि हुई है। वर्तमान
में भारत
अपने सकल घरेलू उत्पाद
का लगभग
60% इस कर से प्राप्त
करता है। भारत में सेवा कर की वर्तमान
दर 14% है।