Skip to main content

Species and tribes of india भारत की प्रजातियां एवं जनजातियां



भारत की प्रजातियां एवं जनजातियां
परिचय
अनुसूचित जनजाति शब्द सबसे पहले भारत के संविधान में इस्तेमाल हुआ था। अनुच्छेद 366 (25) में अनुसूचित जनजातियों को "ऐसी जनजातियां या जनजाति समुदाय या इनमें सम्मिलित जनजाति समुदाय के भाग या समूहों को संविधान के प्रयोजनों हेतु अनुच्छेद 342 के अधीन अनुसूचित जनजातियां माना गया है"

- निग्रिटो मानव समूह भारत में प्रवेश करने वाला पहला समूह है।

- भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, एवं केरल राज्यों के पहाड़ी तथा वन क्षेत्रों और अंडमान द्वीपों में निग्रिटो प्रजाति के मानव समूह हैं।

- उत्तर-पूर्व में आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर अन्नामलाई पहाड़ियों के अर्ध-गोलाकार भाग में चेंचू जनजाति रहती है।

- पश्चिमी घाट के सहारे दक्षिण कन्नड़, कुर्ग की पहाड़ियों के निचले इलाकों में युरुबा और टोडा रहते हैं।

- गद्दी, बकरवाल जम्मू-कश्मीर की अनुसूचित जनजातियाँ हैं।

- शैम्पेन, ओंग, जारवा, सेंटलीज अंडमान एवं निकोबार में रहने वाली जनजातियाँ हैं।

- मंगोल प्रजाति समूह का आदि स्थान चीन है, यह प्रजाति उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मालाबार तट पर पाई जाती है।

- सामाजिक तथा आर्थिक दृष्टि से वंचित जाति समूहों को अनुसूचित जातियों के रूप में माना जाता है।

- 80% अनुसूचित जातियां ग्रामीण इलाकों में रहती हैं और भारतीय कृषि को ठोस आधार प्रदान करती हैं।

- 2001 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जातियां ग्रामीण इलाकों में रहती हैं और भारतीय कृषि को ठोस आधार प्रदान करती हैं।

- 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जातियों की जनसँख्या 104,281,034 है। जो कुल जनसँख्या का 8.6 % है।

- कृषि से सम्बंधित होने के कारण अनुसूचित जातियां मुख्यतः उत्तरी भारत के विशाल उपजाऊ तटीय मैदानों में संकेंद्रित हैं।

- देश के पहाड़ी तथा जंगली क्षेत्रों में जहाँ जनजातीय लोगों का संकेन्द्रण है, वहीँ अनुसूचित जातियों की संख्या काफी विरल है।

- 2001 एवं 2011 की जनगणना के अनुसार 5 राज्यों पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली एवं पुदुचेरी में कोई भी अनुसूचित जनजातियां, अनुसूचित नहीं हैं।

जनसांख्यिकीय विशेषताएं

जनजाति - कुल - पुरुष - स्त्री - निवास स्थान (राज्य)

1. भील - 12689952 - 6428757 - 6261195 - त्रिपुरा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, आन्ध्रप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक

2. गोंड - 10859422 - 5441476 - 5417946 - बिहार, . बंगाल, झारखंड, ओड़िसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक

3. संथाल - 5838016 - 2945209 - 2892807 - बिहार , त्रिपुरा , . बंगाल, ओड़िसा, झारखंड

4. मीणा - 3800002 - 1976425 - 1823577 - राजस्थान, मध्य प्रदेश

5. नैकड़ा - 3344954 - 1696530 - 1648424 - कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, दमन और दीव, दादर और नगर हवेली, महाराष्ट्र, गोआ

6. उरांव - 3142145 - 1580607 - 1561538 - बिहार, . बंगाल, झारखंड, ओड़िसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र

7. सुगेलिस - 2077947 - 1071589 - 1006358 - आन्ध्र-प्रदेश

8. मुंडा - 1918218 - 966070 - 952148 - बिहार, . बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, ओड़िसा

9. नागा - 1820965 - 937444 - 883521 - नागालैंड

10. खोंड - 1397384 - 689330 - 708054 - बिहार, . बंगाल, झारखंड, ओड़िसा

11. बोरो - 1352771 - 682710 - 670061 - असम

12. कोली महादेव - 1227562 - 625019 - 602543 - महाराष्ट्र

13. खासी - 1138356 - 564412 - 573944 - मिज़ोरम, मेघालय, असम

14. कोल - 991400 - 508920 - 482480 - ओड़िसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र

15. वरली - 974916 - 484893 - 490023 - गुजरात, दमन और दीव, दादर और नगर हवेली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा

16. कोकण - 812770 - 405524 - 407246 - दादर और नगर हवेली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक

17. कंवर - 812770 - 405524 - 407246 - ओड़िसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र

18. हो - 806921 - 401913 - 405008 - बिहार, . बंगाल, झारखण्ड, ओड़िसा

19. गुज्जर - 799344 - 418655 - 380689 - जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश

20. कोरकू - 774196 - 395334 - 378862 - छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र

21. भूमिज - 765909 - 387336 - 378573 - . बंगाल, झारखण्ड, ओड़िसा

23. गारो - 725502 - 366629 - 358873 - नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, असम, . बंगाल, त्रिपुरा

24. कोया - 692435 - 345040 - 347395 - ओड़िसा, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक

25. एनी मिजो या लुशाई - 667764 - 334983 - 332781 - मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, असम

26. हल्बा - 639094 - 319254 - 319840 - छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र

27. धरुआ - 630469 - 316877 - 313592 - गुजरात, दमन और दीव, दादर और नगर हवेली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा

28. दुबला - 627599 - 316502 - 311097 - गुजरात, दमन और दीव, दादर और नगर हवेली, महाराष्ट्र, गोवा

29. मिसिंग / मिरी - 587310 - 299790 - 287520 - असम, अरुणाचल प्रदेश

30. त्रिपुरी - 543848 - 275784 - 268064 - त्रिपुरा

31. राठवा - 536135 - 273754 - 262381 - गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक

32. सहरिया - 527015 - 271471 - 255544 - छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान




















Popular posts from this blog

Purpose of computer , कंप्यूटर का उद्देश्य

              कंप्यूटर का उद्देश्य   Purpose of computer आज के युग में कंप्यूटर का महत्व बहुत ही अधिक बढ़ गया है । जीवन के हर क्षेत्र में आज किसी न किसी रूप में कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है ।   इसी आधार पर कंप्यूटर के उद्देश्य निम्नलिखित है - 1. कंप्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के अकाउंट केश बुक , लेजर ,   बैलेंस शीट , सेल्स रजिस्टर , परचेज बुक तथा बैंक विवरण सहजता व शुद्धता एवं गति के साथ तैयार की जा सकती है । 2. विश्व व्यापार , आयात निर्यात की स्थित ,, भुगतान संतुलन आदि के क्षेत्र में भी कंप्यूटर बड़े उपयोगी साबित हो रहे है। 3. चिकित्सा विज्ञान में कंप्यूटर का प्रयोग औषधि निर्माण से लेकर उपचार तक की संपूर्ण प्रक्रिया में हो रहा है। 4.   इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कंप्यूटर की मदद से विभिन्न प्रकार की सरल तथा जटिल मशीनों , छोटे बड़े यंत्रों तथा उपकरणों की उपयोगी मितव्यई तथा सरल डिजाइन सरलता से उपलब्ध हो जाती है , । 5. कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ,   समाचारों का एक लंबी द...

Western painting पश्चिमी चित्रकला

पश्चिमी चित्रकला परिचय 27000-13000 ई . पू . में दक्षिण - पश्चिम यूरोप में गुफा कला के द्वारा तत्कालीन मानव ने अपने जीवन का चित्रण किया। अफ्रीकी कला , इस्लामिक कला , भारतीय कला , चीनी कला और जापानी कला - इन सभी का पूरा प्रभाव पश्चिमी चित्रकला पर पड़ा है। प्राचीन रोमन व ग्रीक चित्रकला प्राचीन ग्रीक संस्कृति विजुअल कला के क्षेत्र में अपने आसाधारण योगदान के लिए विख्यात है। प्राचीन ग्रीक चित्रकारी मुख्यतया अलंकृत पात्रों के रूप में मिली है। प्लिनी द एल्डर के अनुसार इन पात्रों की चित्रकारी इतनी यथार्थ थी कि पक्षी उन पर चित्रित अंगूरों को सही समझ कर खाने की कोशिश करते थे। रोमन चित्रकारी काफी हद तक ग्रीक चित्रकारी से प्रभावित थी। लेकिन रोमन चित्रकारी की कोई अपनी विशेषता नहीं है। रोमन भित्ति चित्र आज भी दक्षिणी इटली में देखे जा सकते हैं। मध्‍यकालीन शैली बाइजेंटाइन काल (330-1453 ई .) के दौरान बाइजेंटाइन कला ने रुढि़वादी ईसाई मूल्यों को व्यवहारिक या...

vyas river ब्यास नदी

ब्यास नदी लम्बाई -470 जलसम्भर क्षेत्र -20.303 ब्यास पंजाब (भारत) हिमाचल में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। नदी की लम्बाई 470 किलोमीटर है। पंजाब (भारत) की पांच प्रमुख नदियों में से एक है। इसका उल्लेख ऋग्वेद में केवल एक बार है। बृहद्देवता में शतुद्री या सतलुज और विपाशा का एक साथ उल्लेख है। इतिहास- ब्यास नदी का पुराना नाम ‘अर्जिकिया’ या ‘विपाशा’ था। यह कुल्लू में व्यास कुंड से निकलती है। व्यास कुंड पीर पंजाल पर्वत शृंखला में स्थित रोहतांग दर्रे में है। यह कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा में बहती है। कांगड़ा से मुरथल के पास पंजाब में चली जाती है। मनाली, कुल्लू, बजौरा, औट, पंडोह, मंडी, सुजानपुर टीहरा, नादौन और देहरा गोपीपुर इसके प्रमुख तटीय स्थान हैं। इसकी कुल लंबाई 460 कि॰मी॰ है। हिमाचल में इसकी लंबाई 260 कि॰मी॰ है। कुल्लू में पतलीकूहल, पार्वती, पिन, मलाणा-नाला, फोजल, सर्वरी और सैज इसकी सहायक नदियां हैं। कांगड़ा में सहायक नदियां बिनवा न्यूगल, गज और चक्की हैं। इस नदी का नाम महर्षि ब्यास के नाम पर रखा गया है। यह प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों में से एक है। स्थिति इस नदी का उद्गम मध्य ह...