Skip to main content

modern history आधुनिक भारत का ईतिहास , राष्ट्रिय आन्‍दोलन 1905 - 1919 ई.



1. प्रथम विश्व युद्ध के पूर्व क्रांतिकारी गतिविधियां
1.बंंगाल

1. 1902- मिदनापुर एवं कलकत्ता में प्रथम क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना (अनुशीलन समिति)

2. 1906- युगांतर नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ।

3. 1905-1906- तक क्रांतिकारी आतंकवाद का समर्थन एवं प्रचार करने वाले अनेक समाचार-पत्रों का प्रकाशन प्रारम्भ, जिनमें संध्या सबसे प्रमुख है।

4. 1907- युगांतर समूह के सदस्यों द्वारा बंगाल के अलोकप्रिय लेफ्टिनेंट गवर्नर फुलर की हत्या का असफल प्रयास।

5. 1908-खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी द्वारा बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के न्यायाधीश श्री किंग्जफोर्ड की हत्या का प्रयास।

6. अरविंद घोष, बरीन्द्र कुमार घोष एवं अन्य पर अलीपुर षड़यंत्र कांड का अभियोग चलाया गया।

7. 1908- पुलिन दास के नेतृत्व में ढाका अनुशीलन समिति के सदस्यों द्वारा बारा में डकैती।

8. 1909- अलीपुर षड़यंत्र केस से संबंधित सरकारी प्रासीक्यूटर की कलकत्ता में हत्या।


9. 1912- रासविहारी बोस तथा सचिन सान्याल ने भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड हार्डिंग के काफिले पर दिल्ली के चांदनी चौक में बम फेंका। तेरह लोग गिरफ्तार, दिल्ली षड़यंत्र केस के तहत मुकदमा चलाया गया। संध्या तथा युगांतर नामक समाचार पत्रों द्वारा क्रांतिकारी आतंकवादियों की उक्त गतिविधियों को पूर्ण समर्थन प्रदान किया गया।

2. महाराष्‍ट्र

- 1879- वासुदेव बलवंत फड़के के रामोसी कृषक दल द्वारा क्रांतिकारी गतिविधियों का शुभारम्भ।

- 1890 से- बालगंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र के लोगों में स्वराज्य के प्रति आस्था जगाने तथा क्रांतिकारी आतंकवादियों को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने हेतु शिवाजी महोत्सव एवं गणेश महोत्सव प्रारंभ किए, उन्होंने अपने पत्रों मराठा तथा केसरी के द्वारा भी क्रांतिकारी आतंकवाद को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया।

- 1897- पूना में प्लेग समिति के प्रधान श्री रैण्ड एवं लैफ्टिनेंट एयसर्ट की चापकर बंधुओं द्वारा हत्या।

- 1899- विनायक दामोदर सावरकर एवं उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर द्वारा एक गुप्त सभा मित्र मेला की स्थापना। 1904- मित्र मेला का अभिनव भारत में विलय।

- 1909- अभिनव भारत के एक सदस्य अनन्त कान्हेर द्वारा नासिक के जिला मजिस्ट्रेट जैक्सन की हत्या।

 3. पंजाब 

पंजाब में क्रांतिकारी आतंकवाद को प्रोत्साहित करने में लाला लाजपत राय, अजीत अम्बा प्रसाद की मुख्य भूमिका रही।

2. विदेशों में क्रांतिकारी आतंकवाद

1. इंंग्‍लेण्‍ड

- श्यामजी कृष्ण वर्मा, विनायक दामोदर सावरकर, मदनलाल धींगरा एवं लाला हरदयाल की मुख्य भूमिका।

- 1905- श्यामाजी कृष्ण वर्मा द्वारा इण्डिया हाउस की स्थापना।

- इण्डिया हाउस से एक समाचार पत्र सोशियोलाजित्ट का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया।

- इण्डिया हाउस में ही सावरकर ने 1857 का स्वतंत्रता संग्राम नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।

- 1909- मदनलाल ढींगरा ने कर्नल विलियम कर्जन वाइली की गोली मारकर हत्या कर दी।


2. फ्रांस 

आर.एस. राणा एवं श्रीमति भीकाजी रूस्तम कामा ने पेरिस से क्रांतिकारी गतिविधियां जारी रखने का प्रयास किया। यहां से बंदेमातरम् नामक समाचार पत्र निकालने का प्रयास।

 3. अमेरिका तथा कनाडा 
  
- लाला हरदयाल प्रमुख नेतृत्वकर्ता।

- 1913 में सैन फ्रेंसिस्को गदर दल की स्थापना।

- गदर नामक साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन

4. जर्मनी 

- लाला हरदयाल के अमेरिका से जर्मनी पहुंचने पर क्रांतिकारी गतिविधियों में तेजी।


- वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय प्रमुख नेता।
5. मार्ले मिन्‍टाेे सुधार  


- केंद्रीय एवं प्रांतीय विधान परिषदों में निर्वाचित सदस्यों की संख्या में वृद्धि।

- गैर-सरकारी निर्वाचित सदस्यों की संख्या अभी भी नामजद एवं बिना चुने हुये सदस्यों की संख्या से कम थी। मुसलमानों के लिये पृथक सामुदायिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की व्यवस्था।

- निर्वाचित सदस्यों का चयन अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता था। इस प्रकार भारत में पहली बार चुनाव प्रणाली प्रारम्भ हुई।

- व्यवस्थापिका समाओं के अधिकारों में वृद्धि की गयी। सदस्यों को आर्थिक प्रस्तावों पर बहस करने, उनके विषयों में संशोधन प्रस्ताव रखने, कुछ विषयों पर मतदान करने, प्रश्न पूछने, साधारण प्रश्नों पर बहस करने तथा सार्वजनिक हित के प्रस्तावों को प्रस्तुत करने का अधिकार दिया गया।

- गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में एक भारतीय सदस्य को नियुक्त करने की व्यवस्था।

3. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्रांतिकारी गतिविधियां

उत्तरी अमेरिका में लाला हरदयाल, रामचन्द्र, भावन सिंह, करतार सिंह सराबा, बरकत उल्ला एवं भाई परमानन्द द्वारा गदर दल का गठन।


4. गदर दल के कार्यक्रम

- सरकारी अधिकारियों की हत्या।

- क्रांतिकारी साहित्य का प्रकाशन।

- विदेशों में पदस्थापित भारतीय सेना के मध्य कार्य करना तथा क्रांतिकारी गतिविधियों हेतु धन एकत्रित करना।

- ब्रिटेन के सभी उपनिवेशों ( केवल भारत) में एक-एक करके विद्रोह प्रारम्भ करना।

- प्रथम विश्वयुद्ध के प्रारम्भ होने तथा कामागाटा मारूप्रकरण (सितम्बर, 1914)से गदर दल की गतिविधियां और तेज हो गयीं। 21 फरवरी, 1915 को गदर दल के कार्यकर्ताओं ने फिरोजपुर, लाहौर और रावलपिंदी में सशस्त्र विद्रोह की योजना बनायी किन्तु विश्वासघात के कारण यह योजना असफल हो गयी।


 5. होमरूल लीग आंदोलन

होमरूल लीग आंदोलन, प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् उत्पन्न हुई परिस्थितियों में एक प्रभावशाली प्रतिक्रिया के रूप में प्रारम्भ हुआ। आयरलैंड के होमरूल लीग की तर्ज पर इसे भारत में एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने प्रारम्भ किया।

6. आंदोलन के प्रारंभ होने में सहायक कारक

- राष्ट्रवादियों के एक वर्ग का यह विश्वास कि सरकार का ध्यान आकर्षित करने हेतु उस पर दबाव डालना आवश्यक है।

- मार्ले-मिंटो सुधारों से मोहभंग होना।

- युद्धोपरांत भारतीयों पर आरोपित आर्थिक बोझ से त्रस्त भारतीय किसी भी आंदोलन में भाग लेने हेतु तत्पर थे।

- बालगंगाधर तिलक एवं एनी बेसेंट ने तत्कालीन परिस्थितियों में योग्य नेतृत्व प्रदान किया।

- प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन की साम्राज्यवादी मंशा का उजागर होना।


7. आंदोलन का उद्देश्य
1. तिलक की होमरुल लीग 

तिलक ने अप्रैल 1916 में इसकी स्थापना की। इसकी शाखायें महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांत एवं बरार में खोली गयीं। इसे 6 शाखाओं में संगठित किया गया।


2. एनी बेसेंट की होमरुल लीग 



3. आंदोलन की विधिया  
 जनसभाओं का आयोजनपरिचर्चा आयोजित करनापुस्तकालय एवं अध्ययन कक्षों की स्थापनासम्मेलनों का आयोजनविद्यार्थियों की कक्षाएं आयोजित करनासमाचार पत्रपैम्फलेट्सपोस्टरपोस्ट कार्ड एवं नाटकों के माध्यम से भारतीय जनमानस को होमरूल अर्थात् स्वशासन के वास्तविक अर्थो से परिचित कराना।


4. आंदोलन के प्रति सरकार के रुुुुख 

दमनात्मक कार्यवाई, राजनीतिक सभाओं पर प्रतिबंध, तिलक एवं एनी बेसेंट पर मुकदमा, राजनैतिक गिरफ्तारियां इत्यादि।


 5. आंदोलन की उपलब्धिया 

भारतीयों में चेतना का प्रसार, देश एवं शहरों के बीच सांगठनिक सम्पर्क की स्थापना, जुझारु राष्ट्रवादियों की नयी पीढ़ी का निर्माण, उग्रवादियों एवं नरमपंथियों के मध्य पुर्नएकीकरण को प्रोत्साहन, जिसके फलस्वरूप 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस के दोनों दलों में एकता का मार्ग प्रशस्त हुआ।

6. कांग्रेस का लखनउ अधिवेशन 1916

- उग्रवादी पुनः कांग्रेस में सम्मिलित।

- कांगेस एवं मुस्लिम लीग के मध्य समझौता।

- कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग का संयुक्त घोषणा-पत्र।

- कांग्रेस द्वारा मुस्लिम लीग की पृथक प्रतिनिधित्व की मांगे स्वीकार की गयीं।

- इसके भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में दूरगामी परिणाम हुये।




Popular posts from this blog

Purpose of computer , कंप्यूटर का उद्देश्य

              कंप्यूटर का उद्देश्य   Purpose of computer आज के युग में कंप्यूटर का महत्व बहुत ही अधिक बढ़ गया है । जीवन के हर क्षेत्र में आज किसी न किसी रूप में कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है ।   इसी आधार पर कंप्यूटर के उद्देश्य निम्नलिखित है - 1. कंप्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के अकाउंट केश बुक , लेजर ,   बैलेंस शीट , सेल्स रजिस्टर , परचेज बुक तथा बैंक विवरण सहजता व शुद्धता एवं गति के साथ तैयार की जा सकती है । 2. विश्व व्यापार , आयात निर्यात की स्थित ,, भुगतान संतुलन आदि के क्षेत्र में भी कंप्यूटर बड़े उपयोगी साबित हो रहे है। 3. चिकित्सा विज्ञान में कंप्यूटर का प्रयोग औषधि निर्माण से लेकर उपचार तक की संपूर्ण प्रक्रिया में हो रहा है। 4.   इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कंप्यूटर की मदद से विभिन्न प्रकार की सरल तथा जटिल मशीनों , छोटे बड़े यंत्रों तथा उपकरणों की उपयोगी मितव्यई तथा सरल डिजाइन सरलता से उपलब्ध हो जाती है , । 5. कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ,   समाचारों का एक लंबी द...

Western painting पश्चिमी चित्रकला

पश्चिमी चित्रकला परिचय 27000-13000 ई . पू . में दक्षिण - पश्चिम यूरोप में गुफा कला के द्वारा तत्कालीन मानव ने अपने जीवन का चित्रण किया। अफ्रीकी कला , इस्लामिक कला , भारतीय कला , चीनी कला और जापानी कला - इन सभी का पूरा प्रभाव पश्चिमी चित्रकला पर पड़ा है। प्राचीन रोमन व ग्रीक चित्रकला प्राचीन ग्रीक संस्कृति विजुअल कला के क्षेत्र में अपने आसाधारण योगदान के लिए विख्यात है। प्राचीन ग्रीक चित्रकारी मुख्यतया अलंकृत पात्रों के रूप में मिली है। प्लिनी द एल्डर के अनुसार इन पात्रों की चित्रकारी इतनी यथार्थ थी कि पक्षी उन पर चित्रित अंगूरों को सही समझ कर खाने की कोशिश करते थे। रोमन चित्रकारी काफी हद तक ग्रीक चित्रकारी से प्रभावित थी। लेकिन रोमन चित्रकारी की कोई अपनी विशेषता नहीं है। रोमन भित्ति चित्र आज भी दक्षिणी इटली में देखे जा सकते हैं। मध्‍यकालीन शैली बाइजेंटाइन काल (330-1453 ई .) के दौरान बाइजेंटाइन कला ने रुढि़वादी ईसाई मूल्यों को व्यवहारिक या...

vyas river ब्यास नदी

ब्यास नदी लम्बाई -470 जलसम्भर क्षेत्र -20.303 ब्यास पंजाब (भारत) हिमाचल में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। नदी की लम्बाई 470 किलोमीटर है। पंजाब (भारत) की पांच प्रमुख नदियों में से एक है। इसका उल्लेख ऋग्वेद में केवल एक बार है। बृहद्देवता में शतुद्री या सतलुज और विपाशा का एक साथ उल्लेख है। इतिहास- ब्यास नदी का पुराना नाम ‘अर्जिकिया’ या ‘विपाशा’ था। यह कुल्लू में व्यास कुंड से निकलती है। व्यास कुंड पीर पंजाल पर्वत शृंखला में स्थित रोहतांग दर्रे में है। यह कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा में बहती है। कांगड़ा से मुरथल के पास पंजाब में चली जाती है। मनाली, कुल्लू, बजौरा, औट, पंडोह, मंडी, सुजानपुर टीहरा, नादौन और देहरा गोपीपुर इसके प्रमुख तटीय स्थान हैं। इसकी कुल लंबाई 460 कि॰मी॰ है। हिमाचल में इसकी लंबाई 260 कि॰मी॰ है। कुल्लू में पतलीकूहल, पार्वती, पिन, मलाणा-नाला, फोजल, सर्वरी और सैज इसकी सहायक नदियां हैं। कांगड़ा में सहायक नदियां बिनवा न्यूगल, गज और चक्की हैं। इस नदी का नाम महर्षि ब्यास के नाम पर रखा गया है। यह प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों में से एक है। स्थिति इस नदी का उद्गम मध्य ह...