मध्यकालीन पश्चिमी स्थापत्य कला
परिचय
प्रारंभिक मध्यकाल
के दौरान
पश्चिमी स्थापत्य कला को प्रारंभिक ईसाई
काल व पूर्व-रोमांसक्यू काल में विभाजित किया
जा सकता
है
रोमांसक्यू
इस काल के दौरान
अधिकांश वास्तुशिल्पी ईसाई भिक्षु
हुआ करते
थे और रोमन स्थापत्य कला का इस काल की स्थापत्य कला पर पूरा तरह से प्रभाव
था। अद्र्धचापाकार मेहराब,
लंबी मेहराब
और आरपार
मेहराब के प्रयोग से इस काल का नाम रोमांसक्यू पड़ा।
फ्लोरेंस, इटली
का सैन मिनिएटो गिरिजाघर इसका सबसे
बड़ा उदाहरण
है।
गोथिक शैली
मध्ययुगीन यूरोप
में व्यापार
में वृद्धि
के साथ ही शहरों
की संख्य
में भी वृद्धि हुई।
यहां धनी बैंकरों, व्यापारियों और उद्योगपतियों ने शानो-शौकत के मामले में सामंतों का मुकाबला करना
शुरू कर दिया और बड़े-बड़े
गिरिजाघरों का निर्माण कराया।
अब वास्तुशिल्पियों को मास्टर मेसॉन
कहा जाने
लगा। नुकीले
मेहराब, मेहराबदार छत की डॉट और चाकरूप पुश्ता
गोथिक शैली
की तीन सबसे बड़ी
विशेषताएं थीं।
इन तीनों
विशेषताओं को यूरोपीय स्थापत्य की सबसे
बड़ी उपलब्धि
माना जाता
है। पेरिस
के नोत्रे
डेम डि
(1163) और चाल्र्स
गिरिजाघर (1195) को इस शैली
का सबसे
खूबसूरत उदाहरण
माना जाता
है।
नवजागरण शैली
1. 15वीं शताब्दी
में यूरोप
में पूँजीवाद, शहरों की संख्या में वृद्धि, धनियों
की संख्या
में वृद्धि
और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की भावना के जन्म से नवजागरण काल का उदय हुआ। नवजागरण
काल के दौरान कलाकारों व विचारकों ने प्राचीन
रोमन व ग्रीक सभ्यता
की खोज करके उसको
पुन: स्थापित
किया। नवजागरण
काल का सर्वप्रथम उदय इटली में हुआ। इस पुनर्जागरण का प्रभाव समस्त
यूरोप के सभी क्षेत्रों में पड़ा।
इस काल के कलाकारों में स्थापत्य व मूर्तिकला में बौद्धिकता की झलक साफ दिखाई
देती है। कलाकारों ने स्थापत्य कला में प्राचीन
रोमन स्थापत्य कला का समावेश किया।
इस नई शैली के
2. प्रारंभिक प्रतिनिधि कलाकार फिलिप्पो ब्रूनेलेस्ची और ल्यॉन बतिस्ता
अल्बर्टा थे। सिस्टाइन चैपेल
की छत के चित्रकार, डेविड के मूर्तिकार और रोम के सेंट पीटर्स
चर्च के गुंबद के स्थापत्यकार माइकेलएंजिलो नवजागरणकाल के प्रतिनिधि पुरुष
थे।
सदाचार और बरोक शैली
1. सदाचारवाद शब्द
का सर्वप्रथम प्रयोग कला इतिहासकार, स्थापत्यकार और चित्रकार जिऑर्जियो वासेरी
(1511-74) ने लियोनार्डो डि विन्सी,
राफेल और माइकेलएंजिलो के कार्र्यों को ब्याख्यायित करने
के लिए किया था। यदि नवजागरणकाल के स्थापत्य ने मानव
संस्कृति के पुनर्जन्म की घोषणा की तो सदाचारवाद और बरोक
शैली ने अर्थ और निरुपण के बारे में बढ़ती हुई चिंता को व्यक्त किया।
साइंस और दर्शन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विकास
की वजह से यथार्थ
का गणितीय
निरुपण बाकी
संस्कृति से पूरी तरह से अलग हो गया।
इससे स्थापत्य में दुनिया
के बारे
में एक विशेष प्रकार
की दृष्टि
का उदय हुआ। माइकेलएंजिलो ने अपने
बाद के जीवन में नवजागरण काल के कड़े
नियमों का परित्याग करते
हुए सदाचारवाद की शुरुआत
की।
2. बाद में स्थापत्यकार इससे
भी आगे गये और
16वीं शताब्दी
के अंतिम
काल और
17वीं शताब्दी
के प्रारंभिक काल में विग्लोना, बोर्रोमिनी, मडेर्ना और वेरनिनि जैसे
कलाकारों ने नवजागरण कला के नियमों
में परिवर्तन करते हुए बरोक शैली
का विकास
किया। रोम का सैन कार्लो चर्च
जिसका निर्माण
बोर्रोमिनी ने किया था, इसका प्रमुख
उदाहरण है।