संघ व इसके संघीय
प्रदेश
- संविधान का अनुच्छेद 1 से 4 ,संघ व इसके संघीय प्रदेशों के बारे में बताता है।
- अनुच्छेद 1 कहता है कि इंडिया जो कि भारत एक राज्यों का संघ है, राज्यों के फेडरेशन के बजाय।
- अनुच्छेद 3 मौजूद राज्यों में से ही नये राज्य की स्थापना के बारे मे बताता है।
- भारतीय संविधान संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह बिना राज्यों की सहमति के भी राज्यों के नाम, उनकी सीमाएँ परिवर्तन व नये राज्यों का निर्माण कर सकती है।
संघ व इसके संघीय
प्रदेश
- 1953 में फजल अली की अध्यक्षता में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना की गयी। इसके दो अन्य सदस्य एच.एन. कुंजरू व के.एम.पानीकर बनाये गये।
- आयोग ने 1955 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी और भाषा आधरित राज्यों की संकल्पना (सिद्धान्त) को अपनाया गया। लेकिन बाद में इसने ‘एक भाषा – एक राज्य’ का सिद्धान्त को नहीं माना.
- इसने सुझाव दिया कि विभिन्न श्रेणीयों के 27 राज्यों को 16 राज्यों व 3 संघशासित प्रदेशों में विभक्त कर देना चाहिए।
- भारतीय संसद ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 पारित कर दिया और आयोग की सिफारिशें कुछ परिवर्तन के बाद लागु हो गयी।
- 1 नवम्बर 1956 को 14 राज्य व 6 केन्द्र शासित प्रदेश बनाये गये।
- स्वतंत्रता के समय उपस्थित 562 रियासतें अपनी इचछानुसार भारत या पाकिस्तान में विलय हो सकती थी ।
- लेकिन जम्मू कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़ ने स्वतंत्र रहने को फैसला किया अतः इसका मतलब ये हुआ की ये न तो भारत के साथ होंगे और न ही पाकिस्तान के।
- राज्यों के विलय की समस्या को सरदार वल्लभ भाई पटेल व ग्रह सचिव (राज्य मंत्रालय) वी.पी मेनन ने मिलकर सुलझाया।
- 1948 में भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन का अध्ययन करने के लिए तीन सदस्य समिति बनायी जिसके सदस्य जवाहर लाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल व पट्टाभि सीतारमैया बनाये गये। इसे J.V.P. समिति कहते है।
- भाषा के आधार पर गठित प्रथम राज्य = आंध्र प्रदेश (1953)
संघ व इसके संघीय
प्रदेश
- संसद मौजुद राज्यों के नाम, उनकी सीमाऐं, उनके क्षेत्रफल तथा नये राज्यों का निर्माण कर सकती है वह भी उनकी सहमति के बिना भी। इसके लिए एक विधेयक साधारण बहुमत से पारित करना होता है।
- राज्यों का निर्माण या उनकी सीमाओं से परिवर्तन सम्बंधी बिल राष्ट्रपति की पुर्वानुमति पर किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- राष्ट्रपति इस बिल को संसद में प्रस्तुत करने से पहले सम्बंधित राज्यों से सलाह लेने के लिए सम्बंधित विधानसभा में भेज सकता है और इस पर जवाब एक निश्चित समय में देना होता है।
- यदि राज्य विधानसभा एक निश्चित समय में कोई राय नहीं देती है तो समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।
- यदि राज्य विधानसभा कोई राय नहीं दे तो भी बिल को संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- राज्य विधानसभा की राय को मानने के लिए संसद बाध्य नहीं होती है।
1956 के पश्चात
बनाये गये नये राज्य व केन्द्र शासित प्रदेश
» महाराष्ट्र और गुजरात (1960)
- द्वीभाषी राज्य बोम्बे को महाराष्ट्र व गुजरात में विभक्त कर दिया गया और गुजरात भारत का 15वां राज्य बना।
» दादरा और नागर हवेली (1961)
- इस क्षेत्र में 1954 तक पुर्तगालियों का शासन था।
- 10वें संविधान संशोधन अधिनियम 1961 से दादरा व नागर हवेली भारत के संघ शासित प्रदेश बन गये।
» गोवा, दमन और दीव (1961)
- गोवा, दमन और दीव को 12वें संविधान संशोधन अधिनियम 1962 के तहत भारत के संघ शासित प्रदेशों में मिलाया गया। ये पुर्तगालियों के अधीन थे।
- 1987 में गोवा को अलग राज्य व दमन और दीव को एक अलग से संघशासित प्रदेश बनाया गया।
» पांडिचेरी(पुडुचेरी) (1962)
- 1954 तक यह फ्रांस के अधीन था। इसमें चार जिले क्रमश: पांडिचेरी, कराइकल, माहे व यनम शामिल है।
- 14वें संविधान संशोधन अधिनियम 1962 में इसे भारत का संघीय प्रदेश (संघ शासित) बनाया गया।
» नागालैण्ड (1963)
» हरियाणा, चंडीगढ़ (1966)
- 1966 में पंजाब में से हरियाणा राज्य तथा चंड़ीगढ को केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया।
» हिमाचल प्रदेश (1971)
- हिमाचल प्रदेश अधिनियम 1970 से इसे संघ शसित प्रदेश से एक राज्य में परिवर्तित कर दिया गया।
» मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय (1972)
» सिक्किम (1975)
- इसे 35वें संविधान संशोधन अधिनियम 1974 से भारत में ब्रिटिश साम्राज्य से पृथक कर इसे शामिल किया गया।
- इसे पूर्ण राज्य का दर्जा 36 वां संविधान संशोधन अधिनियम 1975 से प्राप्त हुआ।
» मिजोरम, अरूणाचल प्रदेश व गोवा (1987)
» छत्तीसगढ़ (2000)
- यह भारत का 26 वां राज्य, 1 नवम्बर 2000 को बना।
» उत्तराखण्ड (2009)
- 9 नवम्बर 2000 को भारत का 27 वां राज्य बना तब इसका नाम उत्तरांचल था।
- 2007 में इसका नाम उत्तराखण्ड कर दिया गया।
» झारखण्ड (2000)
- भारत का 28 वां राज्य 15 नवम्बर 2000 को बना।
» तेलंगाना (2 जून 2014)
- नवीनतम राज्य जो आंध्रप्रदेश से अलग कर 2 जून 2014 को बनाया गया। (राजधानी हैदराबाद)
69 वें संविधान संशोधन 1991 से 1 फरवरी 1992 को संघ शासित प्रदेश दिल्ली का नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कर दिया गया।