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Indian languages भा‍रतीय भाषाएं


भा‍रतीय भाषाएं
परिचय
प्रसिद्ध भाषाविद ग्रियर्सन के अनुसार भारत में भाषाओं की संख्या 179 और बोलियों की संख्या 544 है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में कुल भाषाओं की संख्या 418 है, जिनमें 407 जीवित भाषाएं हैं जबकि 11 लुप्त हो चुकी हैं।

देवनागरी लिपि में हिंदी भारतीय संघ की भाषा है जबकि विभिन्न प्रदेशों की अपनी-अपनी सरकारी भाषाएं हैं। अंग्रेजी भारतीय संघ की दूसरी राजभाषा है। अंग्रेजी का प्रयोग केंद्र सरकार गैर-हिंदी भाषी राज्यों के साथ संवाद स्थापित करने में करती है। अंग्रेजी नागालैंड और मेघालय की राजभाषा है। भारत के संविधान में 22 भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है जो पूरे देश में बोली जाती हैं।

1. भाषा - राज्य

* असमिया - असम

* बंगाली - त्रिपुरा पश्चिम बंगाल

* बोडो - असम

* डोंगरी - जम्मू-कश्मीर

* हिंदी - उत्तर एवं उत्तर पश्चिमी भारत

* गुजराती - दादरा नागरहवेली, दमन दीव, गुजरात

* कन्नड़ - कर्नाटक

* कश्मीरी - जम्मू-कश्मीर

* कोंकणी - गोवा

* मैथिली - बिहार

* मणिपुरी - मणिपुर

* मलयालम - केरल, लक्षद्वीप, पुदुचेरी

* मराठी - महाराष्ट्र

* नेपाली - सिक्किम

* उड़िया - ओडिशा

* पंजाबी - पंजाब एवं चण्डीगढ़

* संस्कृत - यह किसी राज्य की भाषा नहीं है|

* संथाली - छोटानागपुर पठार के संथालों की भाषा (किसी राज्य की राजभाषा नहीं)

* सिंधी - सिंधी समुदाय की भाषा

* तमिल - तमिलनाडु एवं पुदुचेरी

* तेलुगू - आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना

* उर्दू - जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, दिल्ली उत्तरप्रदेश

भाषाई दृष्टिकोण से भारत में काफी विविधता है। भारतीय भाषाओं का उद्भव विकास अलग-अलग तरीके से हुआ है और वे भारतीय के विभिन्न जातीय समूहों से संबंधित हैं। भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। देश की कुल जनसंख्या का 73 फीसदी भारोपीय परिवार की, 25 फीसदी द्रविड़ परिवार की, 1.3 फीसदी आस्ट्रिक परिवार की तथा मात्र 0.7 फीसदी भाग चीनी-तिब्बत परिवार की भाषाएं बोलता है।

2. भारतीय भाषाओं को मुख्य रूप से चार परिवारों में वर्गीकृत किया जाता है-

(1) इंडो-यूरोपीय या भारोपीय परिवार

(2) द्रविड़ परिवार

(3) आस्ट्रिक परिवार

(4) चीनी-तिब्बती परिवार।

भारोपीय और द्रविड़ परिवार देश के प्रमुख भाषा परिवार हैं।

भारोपीय परिवार

यह भारतीय भाषाओं में सबसे महत्वपूर्ण भाषा परिवार है और देश की प्रमुख भाषाएं हिंदी, बंगाली, मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, असमी, उडिय़ा, कश्मीरी, उर्दू, मैथिली और संस्कृत इसमें शामिल हैं।

द्रविड परिवार

यह देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण भाषा परिवार है जिसमें दक्षिण भारत में बोली जाने वाली लगभग सभी भाषाएं शामिल हैं। द्रविड़ भाषाएं काफी प्राचीन हैं। इस भाषा परिवार की भाषाओं का देश के बाहर की भाषाओं से कोई संबंध नहीं है। रूसी भाषाशास्त्री एस. एस. एंद्रोनोव के अनुसार प्रोटो-द्रविड़ से 21 द्रविड़ भाषाओं की उत्पत्ति हुई। इस भाषा परिवार को तीन भागों- दक्षिणी द्रविड़ वर्ग, मध्य द्रविड़ वर्ग उत्तरी द्रविड़ वर्ग में विभाजित किया जाता है। इस परिवार की सात मुख्य भाषाएं- कन्नड़, तमिल, मलयालम, तुलु, कोडागू, तोडा और कोटा हैं।

चीनी – तिब्‍बत परिवार

इस भाषा परिवार को बोलने वाले उत्तरी बिहार, उत्तरी बंगाल और असम में पाये जाते हैं। इन भाषाओं को भारोपीय परिवार की भाषाओं से अधिक पुराना माना जाता है और इनको बोलने वालों को प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में किरात के नाम से जाना जाता था।

1. इस समूह की भाषाओं को तीन शाखाओं में विभाजित किया जाता है-

(1) तिब्बती हिमालय,

(2) उत्तरी असम तथा

(3) असमी-म्यांमारी।

2. तिब्बती-हिमालयी भाषाओं को दो वर्गों में विभाजित किया गया है-

(1) भोटिया वर्ग तथा

(2) हिमालय वर्ग।

भोटिया वर्ग की भाषाओं में तिब्बती, बाल्ती, लद्दाखी, लाहूली, शेरपा, सिक्किमी-भोटिया आदि भाषाएं शामिल हैं। हिमालय वर्ग में चम्बा, लाहौली, किन्नौरी और लेप्चा भाषाएं आती हैं। उत्तरी असमी वर्ग में 6 बोलियां शामिल हैं- अका, डफला, मिरी, अबोर, मिश्मी तथा मिशिंग। असमी-म्यांमारी वर्ग की भाषाओं को पांच उपवर्गों में विभाजित किया जाता है- बोडो, नागा, कचिन, कुकिचिन और म्यांमारी-बर्मी।

ऑस्ट्रिक परिवार

ऑस्ट्रिक भाषा परिवार का विकास भूमध्य सागर से आये हुए निवासियों द्वारा हुआ। ऑस्ट्रिक भाषाएं मध्य और पूर्वी भारत के पहाड़ी वन इलाकों में बोली जाती हैं। ये काफी प्राचीन भाषाएं हैं और इनको बोलने वालों को प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में निषाद कहा जाता था। इस भाषा परिवार की सबसे महत्वपूर्ण भाषा संथाली है जिसे लगभग 50 लाख संथाल बोलते हैं। मुंडा जनजाति द्वारा बोली जाने वाली मुंदरी दूसरी सबसे महत्वपूर्ण भाषा है।

अन्‍य भाषाएं

गोंडी, ओरांव, मल-पहाडिय़ा, खोंड और पारजी जैसी कुछ आदिवासी भाषाएं हैं जो अपने-आप में अनूठी हैं और इन्हें किसी भाषा परिवार के अंतर्गत नहीं रखा जा सकता है।



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