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Preamble of constitution संविधान की प्रस्तावना

परिचय

                   प्रस्‍तावना भारत को एक प्रभुसत्ता सम्‍पन्‍न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक घोषित करता है जिसे समस्‍त शक्ति जनता से प्राप्‍त होती है तथा जो अपने नागरिको को समाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक न्‍याय प्रदान करना चाहता है।

प्रभुसत्ता समपन्‍न से अभिप्राय - राज्‍य आंतरिक व बाह्य मामलों में पुरी तरह स्‍वतंत्र है तथा किसी बाह्य शक्ति पर निर्भर नहीं है।

प्रस्तावना में प्रयुक्त शब्दो के अर्थ

» समाजवादी शब्‍द 42 वे संविधान संशोधन अधिनियम 1976 से जोड़ा गया। इसका मतलब भारत में मिश्रित अर्थव्‍यवस्‍था रहेगी व समाज प्रमुखता होगी।

» धर्म निरपेक्षता शब्‍द 42 व संविधान संशोधन अधिनियम 1976 से जोड़ा गया। इसका मतलब राज्‍य का कोई अपना धर्म नहीं होगा व सभी धर्मो का समान आदर करेगा।

» लोकतंत्र शब्‍द : सरकार को समस्‍त शक्ति जनता से प्राप्‍त होती है। शासकों का निर्वाचन जनता द्वारा होगा और वे उन्‍ही के प्रति उत्तरदायी होगें।

» गणराज्‍य : राज्‍य का अध्‍यक्ष एक निर्वाचित व्‍यक्ति है जो एक निश्चित अवधि के लिए पद ग्रहण करता है। भारत का राष्‍ट्रपति देश का मुख्‍य कार्यकारिणी अध्‍यक्ष है।

प्रस्‍तावना को संविधान की कूंजी कहते है।

प्रस्तावना में संशोधन

प्रस्‍तावना के महत्वपूर्ण होते हुए भी आरम्‍भ में इसे संविधान का भाग नही माना गया तथा इसे संविधान की व्‍याख्‍या का स्‍त्रोत स्‍वीकार नही किया गया।

» 1960 में बेरूबारी मामले में सुप्रीम कार्ट ने यह निर्णय दिया कि प्रस्‍तावना संविधान का भाग नहीं है।

» 1973 में केश्‍वानंद भारती केस में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि प्रस्‍तावना संविधान का भाग है और अपने पूर्व फैसले को रद्ध किया। आज संविधान में संसद संशोधन कर सकती है लेकिन प्रस्‍तावना का मूल उद्देश्‍य परिवर्तित नहीं होना चाहिए।

» सज्‍जन सिंह बनाम राजस्‍‍थान मामले में प्रस्‍तावना को अत्‍यधिक महत्‍व दिया गया है।

» प्रस्‍तावना, राज्‍यों के नीति निर्देशक तत्‍वो की तरह कोर्ट मे नहीं ले जायी जा सकती है। यह गैर न्‍यायिक है।

» एन. ए. पालखलीवाला, एक प्रसिद्ध कानुनविद् ने प्रस्‍तावना को संविधान का आइडेंटिटि (पहचान) पत्र कहा।

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