- भारत में संविधान विकास
की प्रक्रिया अंग्रेजो के भारत आगमन से प्रारम्भ हुई। सन् 1600 में अंग्रेज भारत में व्यापारियो
के रूप मे आए। उन्होने ईस्ट इंडिया कम्पनी का गठन किया तथा महारानी एलिजाबेथ से
एक चार्टर प्राप्त किया जिसके अन्तर्गत कम्पनी को भारत में व्यापारिक अभियान
भेजने का आधिकार मिल गया।
- चार्टर प्राप्त करने के
पश्चात् कम्पनी ने स्थानीय शासकों से जमीन तथा अन्य सुविधाएँ प्राप्त कर अनेक
स्थानों पर फैक्ट्रीयां / व्यापार केन्द्र स्थापित किए। कम्पनी के संचालन के
लिए इसे कानून अथवा संविधान बनाने तथा आदेश जारी करने का अधिकार प्रदान किया गया।
- 1757 के
प्लासी के युद्ध में विजय के पश्चात भारत में ब्रिटिश शासन पुरी तरह स्थापित हो
गया।
- 1765 में
शाह आलम ने बंगाल, बिहार व उड़ीसा की दीवानी इन्हें प्रदान कर दी जिसके फलस्वरूप
इन्हे कर वसुलने तथा दीवानी मामलों में न्याय करने का अधिकार मिल गया।
- 1857 की
क्रांति के पश्चात, 1858 में भारत सरकार एक्ट के अन्तर्गत ब्रिटिश ताज ने देश का
समस्त प्रशासन अपने हाथ में ले लिया।
- 1935 में
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह मांग की कि बिना बाह्य हस्तक्षेप के भारत के
लोगों को अपना संविधान बनाने का अधिकार होना चाहिए।
- 1938 में
जवाहर लाल नेहरू ने वयस्क मताधिकर के आधार पर गठित संविधान सभा की मांग प्रस्तुत
की परन्तु ब्रिटिश सरकार ने दुसरे महायुद्ध के प्रारम्भ होने तक इस मांग को स्वीकार
करने से इनकार कर दिया।
- पहली
बार 1940 में ब्रिटिश सरकार ने परिस्थितियों से विवश होकर यह स्वीकार
किया कि भारतीयों को स्वायत भारत के लिए नया संविधान बनाने का अधिकार होना चाहिए।
- दुसरे
महायुद्ध में भारतीयों का सहयोग प्राप्त करने के उद्देश्य से 1942 में
सर स्टेफोर्ड क्रिप्स भारत आये लेकिन कांग्रेस व मुस्लिम लीग को यह स्वीकार नही
था।
- भारत
की संवैधानिक गुत्थी को एक बार फिर 1944 में सी.आर.फारमूले तथा 1945 में
वेवल प्लान के अन्तर्गत सुलझाने का प्रयास किया गया लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
- 1946 में कैबिनेट मिशन प्लान
प्रस्तुत किया गया जिसमें भावी भारत के लिए एक संविधान बनाने हेतु एक संविधान सभा
के गठन का सुझाव दिया गया। संविधान तैयार होने तक एक अस्थायी सरकार गठित करना तय
हुआ जिमें सभी मुख्य राजनैतिक दलो के प्रतिनिधि सम्मिलित किए जाने का सुझाव था।
- इसी बीच जुलाई 1947 में ब्रिटिश संसद ने
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित कर दिया, जिसके अन्तर्गत यह
प्रावधान किया गया कि ब्रिटिश सरकार 15 अगस्त 1947 के दिन सत्ता भारतीयों
को सौंपेगी।
- स्वतंत्रता अधिनियम के
अन्तर्गत दो राज्यो – भारत तथा पाकिस्तान का प्रावधान किया गया।
- 14 – 15 अगस्त की मध्यरात्रि
को औपचारिक रूप से सत्ता सौपने के उद्देश्य से संविधान सभा का एक विशेष सत्र
बुलाया गया।
- भारतीयो को सत्ता सौंपने
के पश्चात संविधान सभा की दोहरी भूमिका हो गयी अर्थात संविधान निर्माण तथा विधि
निर्माण वाली संस्था।
- इस प्रकार पहली बार
संविधान सभा ने भारतीय संसद का रूप ग्रहण कर लिया और इस रूप में 1952 में संसद के चुनाव होने
तक कार्य करती रही।
इस समय संविधान सभा के कुल सदस्य = 296