Skip to main content

Medieval History मध्‍यकालीन भारत , दिल्‍ली सल्‍तनत

सल्‍तनत प्रशासन 


- वजीर सल्तनत प्रशासन में सबसे महत्वपुर्ण मंत्री था। प्रारंभ में वह केवल वित्त विभाग का मंत्री था परन्तु बाद में उसका दायित्व लोक प्रशासन की हर शाखा में बढा दिया गया था।

- आमिर सुल्तान के शाही रक्षकों एवं युद्ध के समय सेना का प्रभारी अधिकारी था।

- अर्जमामलिक सैन्य विभाग के प्रमुख को कहा जाता था।

- दिवान रिसालात प्रमुख काजी के पद पर कार्य करता था। यह धार्मिक मामलों की देखरेख करता था।

- बारिद नामक अधिकारी खुफिया विभाग में कार्यरत थे। ये राज्य के विभिन्न भागों की क्रियाकलापों के बारे में जानकारी प्राप्त करने हेतु शासक द्वारा नियुक्त किये जाते थे।

- तुर्को के देश को जीतने के बाद देश प्रान्तों में विभाजित हो गया था जिसे इक्ता कहा जाता था। कार्यालय धारकों को मुक्ती या वालिस कहा जाता था। यह इक्ता बाद में सुबा बन गए थे।

- प्रान्तों के साथ शिकस थे एवं उनके अधीन परगना आते थे। गांव को 100 या 84 ईकाईयों में बाँटा गया था जिन्हे चौरासी कहा जाता था। परगना का अध्यक्ष अमिल होता था। गांवो के सबसे महत्वपूर्ण लोग खुत (भूमि मालिक) या मुकद्दम कहलाते थे।

  सल्‍तनत काल में कराध्‍ाान 

  
सुल्तान की राजकोषीय नीति हनाफी सुन्नी न्यायविद विद्यालय के वित्त सिद्धांत पर आधारित थी। राजस्व के चार स्त्रोत कुरान के आधार पर मंजुर किये गए थे। ये थे खराज, खम्स, जजिया और जकात। लेकिन दिल्ली सल्तनत में कई कर आरोपित थे जो निम्न है

1. जकात धार्मिक कर सामूहिक रूप से जकात के नाम से जाने जाते थे। यह मुस्लिमों के लिए संपत्ति का 1/40 वाँ भाग था।

2. जजिया यह कर जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा एवं सैन्य सेवाओं से छुट देने के लिए गैर मुस्लिमों पर लगाया जाता था।

3. खराज यह गैर मुस्लिमों पर लगाया गया भूमि कर था।

 सल्‍तनतकालीन विभाग 

 1. दीवान अर्ज - सैन्य विभाग

2. दीवान कोही - कृषि विभाग

3. दीवान बन्दगान - श्रमिकों/गुलामों का विभाग

4. दीवान मुस्ता खराज - ऋणशेष/बचत विभाग

5. दीवान खैरात - दान विभाग

सल्‍तनतकालीन साहित्‍य 


क्रम संख्या - लेखक - पुस्तक /ग्रंथ - मुख्य विषय

1. अल बरूनी - कानून--मौदिस - खगोलशास्त्र

2. अल बरूनी - जवाहिर-इल-जवाहिर - खनिज विज्ञान

3. अल बरूनी - किताब-उल-हिंद - भारतीय विज्ञान एवं दर्शनशास्त्र

4. चद्रबरदाई - पृथ्वीराज रासो - पृथ्वीराज चौहान-IIIके वीर कारनामों का वर्णन

5. फिरोज शाह तुगलक - फुतुहत -फिरोजशाही - आत्मकथा

6. फिरदौसी - शाहनामा - महमूद गजनी के साम्राज्य के बारे में

7. हसन निजामी - ताज-उल-मासीर - इल्बारी वंश का इतिहास

8. इब्न-बतूता - किताब उल-रहला - यात्रा वृत्तांत

9. कल्हण - रजत रंगिणी - कश्मीर का इतिहास

10. मिन्हास उल-सिराज - तबाकत--नासिरी - 1260 तक इस्लाम वंश का इतिहास

11. मलिक-मुहम्मदजायसी - पद्मावत - रानी पद्मावती के विषय में वर्णन

12. शम्स सिराज अफीफ - तारीख -फिरोजशाही - तुगलक वंश का इतिहास

13. जियाउद्दीन बरानी - फतवा--जहाँदारी - विश्वव्यापी/सांसारिक मसलों पर न्यायिक सलाह

14. जियाउद्दीन बरानी - तहकीक--फिरोजशाह - तुगलक वंश का इतिहास



Popular posts from this blog

Purpose of computer , कंप्यूटर का उद्देश्य

              कंप्यूटर का उद्देश्य   Purpose of computer आज के युग में कंप्यूटर का महत्व बहुत ही अधिक बढ़ गया है । जीवन के हर क्षेत्र में आज किसी न किसी रूप में कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है ।   इसी आधार पर कंप्यूटर के उद्देश्य निम्नलिखित है - 1. कंप्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के अकाउंट केश बुक , लेजर ,   बैलेंस शीट , सेल्स रजिस्टर , परचेज बुक तथा बैंक विवरण सहजता व शुद्धता एवं गति के साथ तैयार की जा सकती है । 2. विश्व व्यापार , आयात निर्यात की स्थित ,, भुगतान संतुलन आदि के क्षेत्र में भी कंप्यूटर बड़े उपयोगी साबित हो रहे है। 3. चिकित्सा विज्ञान में कंप्यूटर का प्रयोग औषधि निर्माण से लेकर उपचार तक की संपूर्ण प्रक्रिया में हो रहा है। 4.   इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कंप्यूटर की मदद से विभिन्न प्रकार की सरल तथा जटिल मशीनों , छोटे बड़े यंत्रों तथा उपकरणों की उपयोगी मितव्यई तथा सरल डिजाइन सरलता से उपलब्ध हो जाती है , । 5. कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ,   समाचारों का एक लंबी द...

The first established industry in India भारत मे सर्वप्रथम स्‍थापित उद्योग

भारत मे सर्वप्रथम स्‍थापित उद्योग 1. सूती वस्त्र - 1818 - फोर्ट ग्लोस्टर ( कोलकाता ) 2. कागज - 1832 - सेरामपुर ( प . बंगाल ) 3. चीनी उद्योग - 1840 - बेतिया ( बिहार ) 4. सीमेंट - 1854 - चेन्नई 5. जूट - 1859 - रिशरा ( प . बंगाल ) 6. लौह इस्पात - 1870 - कुलटी ( प . बंगाल ) 7. ऊनी वस्त्र - 1876 - कानपुर ( उ . प्र .) 8. कृत्रिम वस्त्र रेशा ( रेयान ) - 1920 - त्रावणकोर ( केरल ) 9. एल्युमिनियम - 1937 - जे . के . नगर 10. भारी इंजीनियरिंग - 1958 - रांची ( झारखण्ड )

Science , Classification of plant पादप जगत का वर्गीकरण

पादप जगत का वर्गीकरण परिचय वर्गिकी  (Taxonomy)  वर्गीकरण   का   विज्ञान   है ,  जो   जीवों   की   व्यापक   विविधता   के   अध्ययन   को   आसान   बनाता   है   और   जीवों   के   विभिन्न   समूहों   के   बीच   अंतर्संबंधों   को   समझने   में   हमारी   मदद   करता   है।   पादप   जगत   में   प्रथम   स्तर   का   वर्गीकरण   पादप   शरीर   के   अंतर ,  परिवहन   के   लिए   विशेष   ऊतकों   की   उपस्थिति ,  बीज   धारण   करने   की   क्षमता   और   बीज   के   फलों   के   अंदर   पाये   जाने   पर   निर्भर   करता   है। थेलोफाइटा शैवाल ,  कवक   और   बैक्टीरिया   जैसे   सूक्ष्म   जीवाणुओं   के   प्रकार   को   इस   श्र...